सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Wednesday, August 31, 2011

जीवन की तस्वीर है यह........!




                                 शिकवा  क्या  करें   इस   जहाँ  से ,
                                       मानवीय  संवेदनाओ   से   परे  है  यह .

                                तकदीर   के   हाथो   खेल   रही ,
                                         जीवन  की  तस्वीर  है  यह.

                                संवेदनाओ   के  हवन  कुण्ड  से  निकलती ,
                                      चमक  नहीं  ये   बेबसी   की  लपटे  है.

                                 दम  तोड़ती  है  यहाँ  संवेदनाए ,
                                           क्यूंकि , बे- गैरत  इंसानो  से ,
                                                       भरा है  यह  जहाँ.

                                  नशे  का गर  हवन - कुण्ड  है  , तो 
                                         लालच  की  है  इसकी  दीवारें .
                                   स्वाहा  होती है  यहाँ  जिदगियाँ  , पर 
                                               कौन  उन्हें  संभाले ......!

                                   कतरा - कतरा   बह  रहा है  खून ,
                                           उजड़   रहे   है  चमन ,
                                   फिर   भी   कोशिश   यही   है  कि,
                                           हम   इन्हें  बचा ले .......!

                                   मासूम   होती   है  ये  जिंदगानी 
                                          क्यूँ     इसे  नरक   बना  दे .

 
                                   कोई   तो  समझाओ , कोई   तो  बताओ ,
                                              इस  हवन -कुण्ड  में .......,
                                   इंसानो  को   नहीं  , अपने   लालच  , और 
                                               बुराइयो   को   जलाओ .......!

                                                           : - शशि पुरवार


                        आज  देश - विदेश   में  नशा  एक  आम  चीज   हो   गयी   है  , नशे   की   लत  लोगो  में   बढती   जा  रही   है . सिगरते , तम्बाकू ., शराब ...... चरस , गाँजा........ आदि . अनेक  प्रकार  के  साधन उपलब्ध  है   और   लोग  जानते   हुए   भी  नशे  का  सेवन   करते  है   और  इन   चीजो   ने   बच्चो   और  उच्च   वर्गीय   महिलाओं   को   भी  अपना  गुलाम  बना  लिया  है  . सरकार   को  इन  वस्तुओ  से  कमाई  होती  है  तो  वह   भी  अपने  मतलब   के   लिए  बंद  नहीं  करती   और  इन्हें   बनाने  वालो  को  तो   सिर्फ  अपनी  मोटी  रकम  से  मतलब   होता  है .
                 मैंने  नशे  के  ऊपर  लेख  लिखा था  , जो  बहुत  पहले  पत्रिकाओ  में  प्रकाशित   हो  चुका  है. पर  ये  गन्दा  धुआं   आज  भी  अपने  पैर  पसार  रहा   है .  आज  मन   हुआ  कि   इस  पर  कविता  लिख  दू  .  यहाँ   कभी   अपना   लेख   भी   प्रस्तुत  करूंगी .
           अगर  मेरे   लेख  या   कविता  से  किसी  को  भी  कुछ  फर्क  पड़ता है ,  तो  मुझे ख़ुशी   होगी   कि  प्रयास  बेकार  नहीं  हुआ.............!



23 comments:

  1. बहुत सुन्दर , सुन्दर अभिव्यक्ति....

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  2. सुन्दर रचना बधाई और शुभकामनाएं

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  3. Bahut strong subject par poem......Good one...keep it up. Shilu

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  4. thanks shishir ........:)
    nice to see u here .

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  5. its really great . keep it up ..
    nice composition .

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  6. बहुत सुंदर !
    शशि पुरवार जी !

    लेखनी का सदुपयोग किया है आपने !
    नशे का गर हवन - कुण्ड है ,
    तो लालच की है इसकी दीवारें .
    स्वाहा होती है यहां ज़िंदगियां ,
    पर
    कौन उन्हें संभाले ......!


    अजी और कौन संभालेगा … यह काम आप-हम जैसे रचनाकारों को ही करना पड़ेगा :)

    आपके लेख की भी प्रतीक्षा रहेगी ।


    मैंने भी नशाखोरी के खिलाफ़ काव्य लिखा है … कभी ब्लॉग पर भी लगाऊंगा …

    पुनः अच्छी समाजोपयोगी रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  7. आपका बहुत - बहुत शुक्रिया राजेंद्र जी ,
    आप आये और हमारा उत्साह बढाया .
    आपकी काव्य रचना का हमें भी इंतजार रहेगा .

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  8. बहुत पवित्र और कल्याणकारी भाव हैं आपके.
    आपकी कविता दिल को छूती है.
    इस पोस्ट के बारे में मुझे बताने के लिए आपका
    बहुत बहुत आभार.

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  9. kavita k through apne bahut achi baat kahi.....insaan aaj nasha kar k apni zindgi barbad kar rahe hai........zindgi bahut anmol hai,uski kimat samjhe...

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  10. अनमोल जिन्दगी को बचाने के लिए अपनी कलम के जादू से एक बहुत ही अच्छी कविता लिखी शशि जी आपने! हम नशाखोरी और दूसरी गन्दी आदतों से दूर या छोड़ने के लिए आपकी और रचनाओं का इंतज़ार रहेगा !

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  11. तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है शशि जी !- बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

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  12. मौत के साये में जीती चार पल की जिन्दगी
    ये ब्यथा अपनी नहीं हर एक की ये पीर है
    सुन्दर भाव अभिवयक्ति है आपकी इस रचना में
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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  13. मुस्कराहट तबस्सुम हंसी कहकहे
    सब के सब खो गए हम बड़े हो गए

    शजर शाख ऐ गुल गुले- खुशबु
    सब क्या है दरख़्त ऐ जड़े हो गए

    नशा ऐ शोक मज़ा आदत मजबूरी
    यह राहे फ़ना है जो गए उजाड़े गए

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  14. jane kyu jhonk dete hai khud ko nashe ke iss hawan kund me ...no words to say ...Behtreen
    http://ehsaasmere.blogspot.in/

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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sapne-shashi.blogspot.com