सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Wednesday, September 14, 2011

हिंदुस्तान की पहचान .....! " हिंदी "



                                   अनेक   है  बोली  ,
                                             अनेक  है  नाम  ,
                                         यही   तो   है  ,
                                   हिंदुस्तान   की  पहचान .

                                   इस   हिंदुस्तान   का परचम ,
                                               लहराने के लिए ,
                                  कई   वीरो  ने  है  अपना ,
                                                सर कलम किया .

                                   गर्व   होता   है ,
                                           हिन्दुस्तानी  होने   पर , जहाँ
                                   अनेक   भाषा   के   साथ ,
                                           प्यार  ने  भी  है  जन्म  लिया  .


                                    भाषाओ  की  जब   बात  उठे   तो,

                             "  हिंदी  "   हिंदुस्तान  की   " राष्ट्रभाषा "  है

                                          सबसे   प्यारी , सबसे   न्यारी ,
                                       दिल  के  एहसास  को   छूने  वाली ,
                              हिंदी    हमारी   " मातृभाषा  "  है .

                                रस   में   घुल   जाते   है   शब्द  ,
                                      जब  हिंदी   का  है   प्रयोग  किया.

                                " जन-गन-मन  "   और    " वन्दे-मातरम "  ने   ,
                                              फक्र   से  दुनियां   में  ,
                                            हमारा  नाम   रौशन   किया  .


                                             पर   व्यथा   है   इसकी   एक  ऐसी ,  कि
                                    हिंदी   राष्ट्र- भाषा   होने   के  बाबत ,
                                    राष्ट्र- कार्य   में    अंग्रेजी   का  प्रयोग  हुआ .

                                               रस  मे  घुली   इस   प्यारी
                                                             हिंदी   भाषा  पे ,
                                               ये   कैसा   है  जुल्म   हुआ  .


                                           इधर - उधर   जिसे  भी  देखो
                                            अंग्रेजी   के  सुर   लगाता  है.......!
 
                                      हिंदी  को  तो   हाय  हमारी  ,  आज
                                  बस ,  इस  इंगरेजी  ने  ही  मार   डाला   है..

                                        रस   की   तरह   पीकर
                                               इन   शब्दो   को

                                           हिंदी  का  प्रयोग  करो ,
                                    मातृभाषा   है   यह   हमारी
                                           अब   तो   इसका  सम्मान  करो .

                                        " जय हिंद , जय भारत "

                                                                :- शशि पुरवार

                                    







23 comments:

  1. Bahut sundar...hindi is the most beautiful language...

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  2. आप इसी तरह हिन्दी में सुन्दर सुन्दर रचना
    लिखती रहेगीं ,तो यह भी हिन्दी कि बड़ी सेवा होगी.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार .

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  3. जो भी लिखता
    बोलता हिंदी में
    उसे मेरा प्रणाम
    हिंदी जग की शान
    शशीजी की कविता
    निरंतर लगती उसमें
    चार चाँद

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  4. आपका कहना सही है ... हिंदी की आज दुएर्दशा हो रही है जिसके जिम्मेवार हम सभी हैं ... और सब को मिल कर ही इसे सुधारना होगा ... सुन्दर प्रस्तुति है ... आपको हिंदी दिवस की शुभकामनाएं ...

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  5. @ saru ... thank you :)

    @ rakesh kumar ji आपका बहुत - बहुत धन्यवाद .

    @ dr.rajendra ji .. आपका बहुत - बहुत धन्यवाद , आपने तो हमारी लेखनी को ही चार चाँद लगा दिए ,
    कविता की अनुपम सुन्दरता आपकी लेखनी में झलकती है .

    @ दिगम्बर नासवा ..शुक्रिया .... आपका कहना भी सही है सब कुछ बनाने और बिगाड़ने वाला इंसान ही होता है .

    @ जाट देवता (संदीप पवाँर).. शुक्रिया , हिंदी है हमारी शान , हिंदी ही तो है हमारी पहचान ...!

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  6. सुन्दर प्रस्तुति शशि जी
    अब हमें हिंदी दिवस या हिंदी फखवाडा नहीं बल्कि हिंदी कि शताब्दी मनानी चाहिए

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  7. बहुत सुन्दर शशि जी अच्छा प्रहार किया है बिलकुल सच कहना है आपका
    बहुत बहुत बधाई हो आपको भी हिंदी दिवस की आपने बुलाया था पर आने में देर हो गई माफ़ी चाहूँगा

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  8. गर्व होता है ,
    हिन्दुस्तानी होने पर ,जहाँ
    अनेक भाषा के साथ ,
    प्यार ने भी है जन्म लिया .

    हिंदी और हिन्दुस्तान के बारे में आपके द्वारा कही गयी बातें प्रासंगिक है ...आपका आभार

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  9. बहुत सुन्दर अहसासों से भरे शब्द
    इस खूबसूरत अभिव्यक्ति के लिए आपका बहुत-बहुत आभार...
    .बधाई हो आपको भी हिंदी दिवस की

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  10. इस खूबसूरत अभिव्यक्ति के लिए आपका बहुत-बहुत आभार|
    हिंदी दिवस की आपको भी बधाई|

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  11. "गर्व होता है
    हिन्दुस्तानी होने पर , जहाँ
    अनेक भाषा के साथ ,
    प्यार ने भी है जन्म लिया."--
    शशि जी,यही कारण है कि हमें अपने देश से इतना प्यार है. देश और देश-भाषा का सम्मान नहीं तो आपना भी मान कहाँ?
    आपके जज्बे और आपकी लेखनी दोनों को सलाम.

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  12. भाषा के प्रति लगाव सिर चढ़के बोल रहा है -जिन्हें नाज़ है हिंद पर वे यहाँ हैं ........ये हिंदी हमारी हमारा वतन है ,अमन का चमन है ....

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  13. हिंदी का प्रयोग करो ,
    मातृभाषा है यह हमारी
    अब तो इसका सम्मान करो .

    हमारी भी कामना है कि आपका यह संदेश लोग समझ सकें।

    सादर

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  14. हिंदी का प्रयोग करो ,
    मातृभाषा है यह हमारी
    अब तो इसका सम्मान करो ..
    हिंदी भाषा के साथ अत्याचार नहीं
    हिंदी भाषा का प्रचार हो ...
    हर एक की जुबान पर मात्र भाषा का बखान हो ,,,,,, .बहुत सुन्दर सन्देश दिया आपने आभार ....

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  15. आपने हम सभी का हिंदी प्रेम निचोड़ कर रख दिया है अपनी पंक्तियों में....बहुत खूब

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  16. हिंदी का प्रयोग करो ,
    मातृभाषा है यह हमारी
    अब तो इसका सम्मान करो .


    बेहद उत्कृष्ट संदेशपरक रचना.
    इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक शुभकामनायें...

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  17. खूबसूरत अभिव्यक्ति |

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  18. शशी जी नमस्कार आपकी रचना सुन्दर भावों से सजी है पर उसमे एक शब्द गलत छप गया है जिससे उसका अर्थ ही गलत हो रहा है आप उसे ठीक कर लें कभी सही लिखे तो भी गलत हो जाता है। चाहे बहन या हम उम्र दोस्त माने ।

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  19. शशी जी देखिये मैने शब्द तो बताया ही नही परचम की जगह परपंच छपा है। धन्यवाद्।

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  20. shukriya suman ji dhyan nahi gaya typing mistake ho gayi .

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  21. हिन्दीभक्त को पाकर मन प्रसन्न हुआ!साधुवाद ।

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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