सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Saturday, June 2, 2012

शिशु सा मन ....!



आँखों का पानी 
बनावट के फूल 
कच्चे है धागे .

घना कोहरा 
नजरो का है फेर 
गहरी खाई .

रूई सा फाहा 
नजरो में समाया 
उतरी मिस्ट .

कोई न जाने 
दर्द दिल में बंद 
बेटी पराई .

अकेलापन 
मन की उतरन 
अँधेरी रात .


सफ़र संग 
छटती हुई धुंध 
कटु सत्य .

चटक लाल 
प्राकृतिक खुमार    
अमलतास .


तीखी चुभन 
घुमड़ते बादल
तेज रफ़्तार .


खारा लवण
कसैला हुआ मन 
समुद्री जल .

उड़ता पंछी
पिंजरे में जकड़ा 
है परकटा .

तेज हवा में 
सुलगता है दर्द 
जमती बर्फ .

उफना दर्द 
जख्म बने नासूर 
स्वाभिमान के .

शिशु सा मन 
ढूंढता है आँचल 
प्यार से भरा .
     :--शशि पुरवार






 

8 comments:

  1. bahut khoobsurat haaiku ek se badhkar ek.

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन हाइकू ,,,,,,

    RECENT POST .... काव्यान्जलि ...: अकेलापन,,,,,

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  3. सभी हाइकु...एक से बढ़ कर एक हैं

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  4. सुन्दर हाइकू

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  5. बेहतरीन .. लाजवाब

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  6. उड़ता पंछी
    पिंजरे में जकड़ा
    है परकटा .

    ye wala mere pe fit baithta hai :P

    waise aapne copy option disbale kyun kar rakha hai.
    javascript ka kya hai disable kar do to koi kaam ki nahi...example aapke samne hai :P

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  7. Very nice post.....
    Aabhar!
    Mere blog pr padhare.

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  8. बहुत सुंदर रचना। ऐसी रचनाएं कभी कभी पढने को मिलती हैं।
    फुर्सत मिले तो आदत मुस्कुराने की पर ज़रूर आईये

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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