सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Sunday, August 12, 2012

दोहे ........

1  सबसे कहे पुकार कर , यह वसुधा दिन रात
   जितनी कम वन सम्पदा , उतनी कम बरसात .

2   इन फूलो के देखिये , भिन्न भिन्न है नाम
   रूप रंग से भी परे , खुशबु भी पहचान .

 3 समय- शिला पर बैठकर , शहर बनाते चित्र
    सूख गई जल की नदी , सिकुड़े जंगल मित्र .

 4 बारिश की भीं बूँद ने, छेड़े गीत मल्हार,
    वन-उपवन को मिल गया, खुशबू का उपहार.

 5 टिप टिप करती बूंदे अब , छेड़ रही गान
   धरती पुलकित हो उठी, नभ को हो सम्मान .
 
 6   बूँदेँ टिप टिप कर रहीँ, छेड रहीँ अब गान,
      धरती भी हर्षित हुई, नभ का कर सम्मान ।

7   ज्ञान नयन तो खोलिए , जीवन है अनमोल
    शब्द शब्द है कीमती , सोच समझ कर बोल .

 8   चक्षु ज्ञान के खोलिए, जीवन है अनमोल,
     शब्द बहुत हैँ कीमती, सोच समझ कर बोल । ।

  9   अपनी नेकी छोड़ कर , बदल गया इंसान
       मक्कारी का राज है , सिसक रहा ईमान .

10   संगति का होता असर , वैसा होता नाम
       सही राह मिले जब , पूरे होते काम । 
11    पीले पत्रक दे गए , शाखो को पैगाम
       नवजीवन का आगमन , अर्थपूर्ण है काम .

12   परे कर मन का अज्ञान , पुस्तकों से बंदगी .
      विधा के आलोक संग , सफल यह जिंदगी .
 
 13    चन्द्रमा सी चारुता , लोचन में समाए
      रूप चार दिन का ही , गुण महकता जाए.

14   सूख गयी जल की नहर , सिमट गए अब गांव
       बने कंकरीट के जंगल , पड़े मानवी पांव .
------------------- हाइकु -------------

क्लांत नदिया
वाट जोहे सावन
जलाए भानु .
...
आया सावन
खिलखिलाई धरा
नाचे झरने .

नाचे मयूर
झूम उठा सावन
चंचल बूंदे.

काली घटाए
सूरज को छुपाये
आँख मिचोली .

बैरी बदरा
घुमड़ घुमड़ के
आया सावन .
----- शशि पुरवार

6 comments:

  1. वाह....
    बढ़िया दोहे...बेहतरीन हायकू....
    आपका जवाब नहीं, काव्य की हर विधा में महारथी..
    :-)
    सस्नेह
    अनु

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  2. बहुत ही अच्छे दोहे और हाइकु भी----।

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  3. बेहद खुबसूरत ....दोहे और हाइकु ....बधाई शशि जी...

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  4. आपकी अनुपम प्रस्तुति पढकर मदमस्त हो गया हूँ शशि जी,
    सुन्दर,प्रेरक और ज्ञानवर्धक.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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