सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, August 27, 2012

दर्द जब बढ़ जाये ........!


दर्द  जब बढ़ जाये
एक नशा बन कर
तन को पीता जाये
इस बेदर्द दुनिया से
दर्द कभी न बांटा जाये.

सुख के सभी होते है साथी
दुःख में कभी काम न आये
हमेशा नेकी ही डूबे दरियां में
हाँथो में सिर्फ पत्थर नजर आये .

कांच के शीशमहल में


सुन्दर ऊँची दीवारों में
दिखती है सिर्फ चमक
लाश तो किसी को भी
 नजर ही न आये  .

यह वक़्त भी बड़ा बेदर्द  
अच्छाई को सदा छुपा जाये
कर्म किसी को भी न दिखे 
जनाजा निकल जाने के बाद ही
हवा  के रूख में थोड़ी नमी आये .


घूमते है महल में लाश बनकर
शरीर दफनाने पे अब तो
हँसी भी न आये .



बेदर्द दुनिया में ,
नजर आते है सिर्फ  बंकर 
प्यारा सा सीधा साधा दिल
कभी भी किसी को
नजर न आये .
-------- शशि पुरवार

4 comments:

  1. This comment has been removed by the author.

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  2. सुन्दर भावों का पिरोया है आपने ,और खुबसूरत सी रचना हमे पढ़ने को मिली ...

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  3. बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई

    इंडिया दर्पण
    पर भी पधारेँ।

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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