सपने

सपने मेरे नहीं आपके व हमारे सपने हे , समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से मेरी जन्मी रचनाएँ आपकी ही आवाज हैं.
इन आँखों में एक ख्वाब पलता
है,
सुकून हो हर दिल में,
इक दिया आश का जलता है.
बदल दो जहाँ को हौसलों के संग
इसी मर्ज से जीवन खुशहाल चलता है - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी . समाज में सकारात्मकता फैलाने का नाम है जिंदगी , बेटियों से भी रौशन होता है यह जहाँ , सिर्फ बेटे ही नही बेटियों को भी आगे बढ़ाने का नाम है जिंदगी।
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Saturday, September 1, 2012

कुण्डलियाँ

1
  चक्षु ज्ञान के खोलिए,जीवन है अनमोल.
  शब्द बहुत ही कीमती,सोच-समझ कर बोल.
  सोच-समझ कर बोल,बिगड़ जाते हैं नाते.
  रहे सफलता दूर, मित्र भी पास न आते.
   मिटे सकल अज्ञान, ग्रन्थ की बात मान के.
  फैलेगा आलोक,खोल मन चक्षु ज्ञान के.

 2
 संगति का होता असर,वैसा होता नाम.
 सही रहगुजर यदि मिले,पूरे होते काम.
  पूरे होते काम ,कभी अभिमान न करना.
  जीवन कर्म प्रधान,कर्म से कैसा डरना.
 मिले यदि सही साथ,मार्जन होता मति का.
  जीवन बने महान,असर ऐसा संगति का.
3
 समय -शिला पर बैठकर, शहर बनाते चित्र.
सूख गयी जल की नहर, जंगल सिकुड़े ,मित्र.
जंगल सिकुड़े,मित्र,सिमटकर गाँव खड़े हैं .
मिले गलत परिणाम,मानवी-कदम पड़े हैं
बढती जाती भूख,और बढ़ता जाता डर.
लिखें शहर इतिहास,बैठकर समय-शिला पर.
  नेकी अपनी छोड़ कर , बदल गया इंसान 
  मक्कारी का राज है , डोल गया ईमान 
  डोल  गया ईमान  , देखकर रूपया पैसा 
  रहा आत्मा बेच , आदमी यह कैसा 
  दो पैसे के  हेतु  , अस्मिता उसने फेकी 
   चोराहे पर नग्न  , आदमी भूला नेकी
          ----------शशि पुरवार
 
 

6 comments:

  1. सुंदर सार्थक रचना ...
    बधाई आपको !

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  2. आपको पढना वाकई सुखद है
    अच्छी रचना
    बहुत सुंदर

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  3. बहुत ही शिक्षाप्रद कुण्डलियाँ..

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  4. प्रेरक ज्ञान देती बेहतरीन कुंडलियाँ,,,,
    सार्थक प्रस्तुति के लिए बधाई,,,,

    RECENT POST,परिकल्पना सम्मान समारोह की झलकियाँ,

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