सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Sunday, March 24, 2013

अनछुए से रंग



रंगों का त्यौहार
लागे
सबको प्यारा
कहीं रंग कहीं बेरंग
यह कैसा इशारा .

अनछुए से चले  गए
रंग जीवन से
 जब
मांग में सोई  गमी।

हरी मेंहदी
करतल पर दहने लगी ,
फिर
खनकती हंसी
काल कोठरी में पली
और
विरह की आग से खेलते
शृंगारो की खूब होली जली ।

हिय के दलदल में
दफ़न हो गए
हरे पीले लाल रंग ,
श्वेत रंग  वन में जगे,
रंगों  का कोई दोष नहीं
दिलकश  होते है  रंग
क्या लिखा है नियति ने ?
किसे दोष दे ....... ?

हर बार की तरह
मौसम
तो बदलेंगे
वृक्ष तो छाया ही देंगे
पर
सूखें वनों को चाहिए
सिर्फ
प्रेम की फुहार।.
फागुन तो
आता है हर साल
भर 
स्नेह की पिचकारी 
लगाओ  गुलाल।
15.03.13
-- शशि पुरवार

8 comments:

  1. सूखें वनों को चाहिए
    सिर्फ
    प्रेम की फुहार।. sahi bat......

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  2. सबको भाये रंग की होली..
    सुन्दर कविता..

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  3. रंगों की फुहार भाए होली का त्यौहार,,,

    होली की हार्दिक शुभकामनायें!

    Recent post: रंगों के दोहे ,

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  4. बहुत खूब! होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  5. बहुत सुदर
    अच्छी रचना
    होली मुबारक

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  6. बहुत सराहनीय प्रस्तुति.बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में. दिल को छू गयी. आभार !

    ले के हाथ हाथों में, दिल से दिल मिला लो आज
    यारों कब मिले मौका अब छोड़ों ना कि होली है.

    मौसम आज रंगों का , छायी अब खुमारी है
    चलों सब एक रंग में हो कि आयी आज होली है

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  7. सच है प्रेम की फुहार किसी में फर्क क्यों करे ...
    सबको होली की सतरंगी उपहार की जरूरत है ...

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    रंगों के पर्व होली की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ!

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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