सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, March 18, 2013

दोहे



छंद ----दोहे ----पोस्ट गलती से डिलीट होने की वजह से पुनः प्रेषित कर रही हूँ .

1
लुभा रहे है छंद ,मन ,मुश्किल में तलवार
घिस घिस कर कागज़ कलम,जीत लिया संसार।
2
आज छंद से मिल गया , रचना को आकार
 डूब गयी रस में कलम हुआ नया शृंगार
3
भोर स्वप्न वह देखकर ,भोरी हुई विभोर
फूलो का मकरंद पी , यह भौरा चितचोर।
4
भोर सुहानी आ गयी ,तम को पीछे छोर
छाई आशा की किरण ,ह्रदय हुआ चितचोर।
5
भोर सुहानी आ गयी ,पीत वर्ण श्रंगार
मन मंदिर पर छा गया ,बासंती यह खुमार।
6
सर्दी के दिन आ गए , तन को भाये धूप
केसर चंदन लेप से ,खूब निखरता रूप।
7
दिल ने दिल से बात की , अहं हमारा काम
रक्त करें संचार हम , प्रेम सरोवर धाम।
8
नयन मिल गए नयन से , ह्रदय हुआ गुलजार
फूल प्रेम के खिल गए , तन-मन दीना वार।
9
काची माटी से गढ़े ,जितने भी आकार
पल में नश्वर ही गया ,माटी का संसार।
10
इक माटी से ऊपजे ,जग के सारे लाल
मोल न माटी का करें ,दिल में यही मलाल।
11
चाक शिला पर रच रहे ,माटी  के संसार
माटी यह अनमोल है ,सबसे कहे कुम्हार।
12
सबसे कहे पुकार कर ,यह वसुधा दिन रात
जितनी कम वन सम्पदा ,उतनी कम बरसात।
13
इन फूलो के देखिये ,भिन्न भिन्न है नाम
रंग रूप से भी परे ,खुशबु भी  पहचान।
14
समय शिला पर बैठकर ,शहर बनाते चित्र
सूख गयी जल की नदी ,सिकुड़े जंगल मित्र।
15
अपनी नेकी छोड़कर ,बदल गया इंसान
मक्कारी का राज है ,सिसक रहा ईमान।

शशि

4 comments:

  1. सभी दोहे एक से बढ़कर एक !
    बहुत सुंदर प्रस्तुति!
    ~सादर!!!

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  2. सुन्दर और प्रभावी दोहे..

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  3. sabhi mitro ne apne anmol shabdo se sneh pradaan kiya tha , yah post pahale galti se delete ho gayi thi par sabke sandesh surakshit rah gaye the .abhaar sabhi mitrao ka
    सुन्दर और प्रभावी दोहे.. on दोहे
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    प्रवीण पाण्डेय

    on 3/19/13

    सभी दोहे एक से बढ़कर एक ! बहुत सुंदर प्रस्तुति! ~सादर!!! on दोहे
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    Anita (अनिता)

    on 3/18/13

    pyare dohe.. jo bhi likhte ho behtareen likhte ho:) on दोहे
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    Mukesh Kumar Sinha

    on 3/18/13

    एकदम सटीक और सार्थक प्रस्तुति आभार बहुत सुद्नर आभार अपने अपने अंतर मन भाव को शब्दों में ढाल दिया आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में एक शाम तो उधार दो आप भी मेरे ब्लाग का अनुसरण करे on दोहे
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    दिनेश पारीक

    on 3/18/13

    sundar sarthak arth sanjoye dohe .. on दोहे
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    kavita verma

    on 3/15/13

    काम के दोहे ... on दोहे
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    सतीश सक्सेना

    on 3/15/13

    समय शिला पर बैठकर ,शहर बनाते चित्र सूख गयी जल की नदी ,सिकुड़े जंगल मित्र बहुत ही खुबसूरत विचार यथार्थ से साक्षात्कार करते हुए ,शुभकामनाएं on दोहे
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    Lokesh Singh

    on 3/15/13

    बेहतरीन सादर on दोहे
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    Yashwant Mathur

    on 3/15/13

    वाह! सभी दोहे बहुत सुन्दर और सार्थक... on दोहे
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    Kailash Sharma

    on 3/15/13

    बहुत सुन्दर ....... on दोहे
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    उपासना सियाग

    on 3/15/13

    सभी दोहे बहुत अच्छे हैं, विशेषत: 8 ,12-14 बेजोड़ हैं। on दोहे
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    सहज साहित्य

    on 3/15/13

    waah bahut badhiya ....... on दोहे
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    Dr.NISHA MAHARANA

    on 3/15/13

    वाह, बहुत खूब on दोहे
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    प्रवीण पाण्डेय

    on 3/14/13

    बहुत उम्दा भावपूर्ण सुंदर दोहे ,,,बधाई शशि जी,,,, बीबी बैठी मायके , होरी नही सुहाय साजन मोरे है नही,रंग न मोको भाय,,,,, . उपरोक्त शीर्षक पर आप सभी लोगो की रचनाए आमंत्रित है,,,,, जानकारी हेतु ये लिंक देखे : होरी नही सुहाय, on दोहे
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    धीरेन्द्र सिंह भदौरिया

    on 3/14/13

    बहुत अच्छे अर्थपूर्ण, भावपूर्ण दोहे! ~सादर!!! on दोहे
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    Anita (अनिता)

    on 3/14/13

    बहुत सुन्दर और सार्थक दोहे! साझा करने के लिए आभार! on दोहे
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    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

    on 3/14/13

    वाह ... बहुत ही सुन्दर दोहे .. सजीव वर्णन पलों का ... सार्थक अभिव्यक्ति ... on दोहे
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    दिगम्बर नासवा

    on 3/14/13

    बहुत ही सुन्दर दोहे.क्या बात बढिया. आभार on दोहे
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    Madan Mohan Saxena

    on 3/14/13

    बहुत ही सार्थक और सुन्दर दोहे,आभार. on दोहे
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    Rajendra Kumar

    on 3/14/13

    क्या बात बढिया on दोहे
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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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