सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Wednesday, May 1, 2013

न झुकाऒ तुम निगाहे कहीं रात ढल न जाये .....






यूँ  न मुझसे रूठ  जाओ  मेरी जाँ निकल न जाये 
तेरे इश्क का जखीरा मेरा दिल पिघल न जाये

मेरी नज्म में गड़े है तेरे प्यार के कसीदे
मै जुबाँ पे कैसे लाऊं कहीं राज खुल न जाये

मेरी खिड़की से निकलता  मेरा चाँद सबसे प्यारा
न झुकाओ तुम निगाहे  कहीं रात ढल न जाये

तेरी आबरू पे कोई  कहीं दाग लग न पाये
मै अधर को बंद कर लूं  कहीं अल निकल न जाये

ये तो शेर जिंदगी के मेरी साँस से जुड़े है 
मेरे इश्क की कहानी ये जुबाँ फिसल  न जाये 

ये सवाल है जहाँ से  तूने कौम क्यूँ बनायीं

ये तो जग बड़ा है जालिम कहीं खंग चल न जाये
      ---- शशि पुरवार 


17 comments:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए शनिवार 04/05/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. khubsurat bhawon se saji rachna
    aapki har kavita ya gajal
    bhawon se lavrej hoti hai..
    bahut khub......

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  3. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

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  4. बहुत खूब..भावपूर्ण..

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  5. वाह ....बहुत सुन्दर ....शशि जी ...!!

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  6. प्रेम में पगी खूबसूरत ग़ज़ल |

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  7. तेरी आबरू पे कोई कहीं दाग लग न पाये
    मै अधर को बंद कर लूं कहीं अल निकल न जाये

    ---हाँ यही है प्रेम ..सुन्दर प्रेम ग़ज़ल ...शशि जी ...

    'ये सवाल है जहाँ से तूने कौम क्यूँ बनायीं
    ये तो जग बड़ा है जालिम कहीं खंग चल न जाये '
    --- देखने में यह शेर प्रेम के क्रमिक भाव से असम्पृक्त लगता है ...परन्तु यह अन्योक्ति में है और जाति , वर्ग , धर्म द्वारा प्रेम पर अंकुश पर चोट है ....बहुत सुन्दर बधाई....

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  8. ये तो शेर जिंदगी के मेरी साँस से जुड़े है
    मेरे इश्क की कहानी ये गजल भी कह न जाये -भावों से भरी हर पंक्ति खुबसूरत है ,लेकिन मुझे ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी!

    lateast post मैं कौन हूँ ?
    latest post परम्परा

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  9. बहुत बढ़िया.

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  10. मेरी नज्म में गड़े है तेरे प्यार के कसीदे
    मै जुबाँ पे कैसे लाऊं कहीं राज खुल न जाये.

    अदभुत भाव. सुंदर प्रस्तुति.

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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sapne-shashi.blogspot.com