सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Thursday, May 30, 2013

लघुकथा --चोर कौन --- ?



दरवाजे पर हुई आवाज से सुलोचना बाहर आई , एक लड़का था २५ साल का छोटी सी गठरी लिए हुए ,

"मम्मी जी,  सूट  के कपडे है ले लीजिये , कम दाम में ,"

" अच्छा  लाओ दिखाओ "

"यह देखिये सिर्फ 5 ही सफारी के  सेट है , नामी कम्पनी है , बाहर दुकानों पर तो बहुत महंगे मिलते है इसके कपडे  . आप आधे से भी कम में ले लीजिये ,"

"कहाँ से लाये हो ?"

"आप ले  लीजिये , मै झूठ नहीं  बोलूँगा ,  मै  कोई सेल्समेन नहीं हूँ , कही नहीं जाता ,मै  एक ट्रक ड्राइवर हूँ , हमेशा माल लेकर  जाता हूँ ,  रास्ते में  हम 4-5 पेकेट  मेनेजर की मदद से  निकाल लेते है और बेच देते है , जितने में भी बीके , हमें तो खाने पीने  और डीजल से पैसे चाहिए , 2000 रूपए ही मिलते है हमें सामन लाने औए ले जाने के , आप किसी और को मत कहो , नहीं तो मै पकड़ा जाऊंगा , आप इतने बड़े आदमी हो  झूठ नहीं बोल रहा हूँ , मुझे तो बस ऐसे घर जाता हूँ जहाँ कोई सामन ले ले . अभी ये ले लो बाद में मेवे १ ०० रू . किलो के दे जाऊंगा ."

"  कितने में दोगे ..."

"1200 में ले लीजिये , बाहर 3000 तक के मिलते है ,"

"नहीं कम करो 500 में ही दे दो ,"

"ठीक है मम्मी जी .......... मुझे तो सिर्फ बेचना है कहाँ ले जाऊंगा , ठीक है दे दो .......आप सभी ले लो जी , आप तो समझते हो चोरी का सामान  लेकर नहीं घूम सकता , "

"ठीक है 3 दे दो ....... "

" धन्यवाद मम्मी जी ,   मै  बहुत से सामान लेकर जाता हूँ कभी मेवे रहते है कभी सारी   , शक्कर ..........वगैरह  आपको अगली बार 10 रू . किलो से शक्कर  और 100 के भाव से मेवे दे जाऊंगा , आप लेती रहोगी तो हर बार कुछ न कुछ आपको दूंगा , और मुस्कुराकर वह वहां से चला गया ."

सुलोचना के चहरे पर एक गर्वीली मुस्कान आ गयी , और वह गर्व से यह मुझे भी बता रही थी , मैंने चोरी का सामन नहीं लिया वह तो उस बिचारे बच्चे को पैसे की जरूरत थी तो बस उसकी मदद कर दी .
-----शशि पुरवार





13 comments:

  1. चोरी का सामान खरीदना भी तो चोरी है,,

    Recent post: ओ प्यारी लली,

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  2. हर सहायता करने वाला चोर है।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (31-05-2013) के "जिन्दादिली का प्रमाण दो" (चर्चा मंचःअंक-1261) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. देखने के नजरिये का फर्क है !!
    सुन्दर कहानी !!

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  5. प्रवाह बना रहा .तर्क का कोइ अंत नहीं होता .सुंदर .

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  6. इस तरह के सौदेबाजी दिल्ली में भी देखने को मिलती है परन्तु इसका गणित समझ नहीं आता. मुझे तो ऐसा लगता है कि सामान बेचने की एक तरकीब है जिसमे ५ से १० मिनट में सौदा हो जाता है.

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  7. सुन्दर कहानी !!
    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-

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  8. काश सुलोचना का भ्रम टूटे और वह चोरी जैसे कृत्य को प्रोत्साहन न दे।

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  9. रोचक प्रस्तुति

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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