सपने

सपने मेरे नहीं आपके व हमारे सपने हे , समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से मेरी जन्मी रचनाएँ आपकी ही आवाज हैं.
इन आँखों में एक ख्वाब पलता
है,
सुकून हो हर दिल में,
इक दिया आश का जलता है.
बदल दो जहाँ को हौसलों के संग
इसी मर्ज से जीवन खुशहाल चलता है - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी . समाज में सकारात्मकता फैलाने का नाम है जिंदगी , बेटियों से भी रौशन होता है यह जहाँ , सिर्फ बेटे ही नही बेटियों को भी आगे बढ़ाने का नाम है जिंदगी।
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

follow on facebook

https://www.facebook.com/shashi.purwar

FOLLOWERS

Wednesday, May 8, 2013

प्यार मेरा सच्चा ......!




 1
कितनी प्यारी यादें
आँगन में खेले 
वो बचपन की बातें
2
पंछी बन उड़ जाऊं
मै संग तुम्हारे
नया अंबर सजाऊं
3
ये मौसम सर्द हुआ
तुम तो रूठ गए
ये जीवन रीत गया
4
फिर दिल में टीस उठी 
सुप्त पड़े रिश्ते
काया भी सुलग उठी
5
खामोश हुई साँसे 
होठ थरथराये
आँखों ने की बातें
6
 है खेल रही कसमे
पिय संग निभायी
जब वेदी पे रस्में 
7
 ये अम्बर नीला  है
प्यार मेरा सच्चा
इससे भी गहरा है .

------शशि पुरवार


20 comments:

  1. बहुत बढ़िया!! बधाई!

    ReplyDelete
  2. खामोश हुई साँसे
    होठ थरथराये
    आँखों ने की बातें,,,,

    वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,

    RECENT POST: नूतनता और उर्वरा,

    ReplyDelete
  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार.

    ReplyDelete
  4. है खेल रही कसमे
    पिय संग निभायी
    जब वेदी पे रस्मे ...

    सभी छंद लाजवाब ... प्रेम के किसी एक पल को बयाँ करते हुए ....
    बहुत सुन्दर ...

    ReplyDelete
  5. सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको

    ReplyDelete
  6. वधाई! हाइकू और क्षणिका/सीपिका लघु पदीय छंदों के समन्वय से गठित छन्द में बड़ी बड़ी बातें सराहनीय !

    ReplyDelete
  7. waah .....choe hain par gahre hain ......

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर रचना !!

    ReplyDelete
  9. लाजवाब छंद.....बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  10. सर्वोत्त्कृष्ट, अनुपम रचना आभार
    हिन्‍दी तकनीकी क्षेत्र कुछ नया और रोचक पढने और जानने की इच्‍छा है तो इसे एक बार अवश्‍य देखें,
    लेख पसंद आने पर टिप्‍प्‍णी द्वारा अपनी बहुमूल्‍य राय से अवगत करायें, अनुसरण कर सहयोग भी प्रदान करें
    MY BIG GUIDE

    ReplyDelete
  11. कविता में सार्थक प्रयोग होना आवश्यक है
    आप सदैव यह करतीं हैं और रचना का कैनवास बढ़ा देतीं हैं
    इस रचना में भी,जीवन,प्रेम,राग को छोटी छोटी अनुभूति में
    सुंदर बाँधा है
    बधाई

    ReplyDelete
  12. सुन्दर अभिव्यक्ति शशिजी

    ReplyDelete
  13. खूबसूरत रचना...

    ReplyDelete
  14. बड़ी सुन्दर क्षणिकाएं...बहुत सार्थक.. गागर में सागर..

    ReplyDelete
  15. बहुत सुंदर रचना।

    आपकी रचनाएं http://panchayatkimuskan.com/ पर भी प्रकाशित हो सकती है इसके लिए आप अपनी रचनाएं panchayatkimuskan@gmail.com पर ईमेल करें

    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  16. बहुत सुंदर और भावुक .
    एक पिता को तो अपनी बेटी अंत तक नन्ही पारी ही लगती है. बुढ़ापे में उसका बेटी के लिय प्यार बढ़ता है. एक लड़की को एक अजनवी के साथ नस्सेंट ऑक्सीजन की तरह अपनी पहचान खो कर नया -परिवर्तित होना पड़ता है.
    लड़की नहीं तो घर नहीं ,करुना नहीं ,अनुशाशन नही .फिर भी मर्द अपने व्यर्थ एह्न्कार को नहीं छोड़ते .
    बिना पत्नी के पुरुष बिना फूल के फूलदान है.

    ReplyDelete
  17. सूक्ष्म और गहरी रचना .
    हार्दिक बधाई .

    ReplyDelete

आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए अनमोल है। कृपया दो शब्द फूल का तोहफा देकर हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार
आपके ब्लॉग तक आने के लिए कृपया अपने ब्लॉग का लिंक भी साथ में पोस्ट करें
सविनय



linkwith

sapne-shashi.blogspot.com