सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Wednesday, June 26, 2013

पीने में रम गया है मन ........

ये कैसी लगी है अगन
घर द्वार भूल कर
पीने में रम गया है मन .

मीठे गरल का प्याला
उतरा हलक में
फिर लाल डोरे खेल
रहे थे पलक में
मुख में बसी फिर गालियाँ
सड़क पे ढुलक रहा तन .

घर द्वार भूल कर
पीने में रम गया है मन .

मधुशाला में रहकर
आबरू गवाँई
वो चुपके से पी गयी
सारी कमाई
छुट गए रिश्ते नाते
शुरू हो गया है पतन .

घर द्वार भूल कर
पीने में रम गया है मन .

मधु में नहाकर होठ
हो गए है काले
हलक से नहीं उतरते
है फिर निवाले
घुल गयी सुरा साँसों में
अब खो रहा है जीवन .

घर द्वार भूल कर
पीने में रम गया है मन .



- शशि पुरवार


 

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बुधवार (26-06-2013) को धरा की तड़प ..... कितना सहूँ मै .....! खुदा जाने ....! अंक-१२८८ मे "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. जितना शीघ्र यह छोड़ दिया जाये, उतना ही अच्छा...सुन्दर उपयोगी रचना।

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. pahle log sharab peete hain bad me unhe sharab pine lagta hai ......bahut achhi prastuti ....

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  5. पीने का शौक हो तो ऐसा नशा किया जाय जिसका परिणाम अवसाद नहीं आनन्द हो !

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  6. मधुशाला में रहकर
    आबरू गवाँई
    वो चुपके से पी गयी
    सारी कमाई
    छुट गए रिश्ते नाते
    शुरू हो गया है पतन .

    पीने के नुक्सान गिनाती लाजवाब रचना है ये ... इस बिमारी से जितना जल्दी चुत्कारापा लिया जाए अच्छा है ...

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  7. पूछो मत इन पियक्कड़ इंसानों की ....इनके लिए इंसान कहना किसी गाली से कम नहीं ...
    बहुत खूब

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  8. मधु में नहाकर होठ
    हो गए है काले
    हलक से नहीं उतरते
    है फिर निवाले
    घुल गयी सुरा साँसों में
    अब खो रहा है जीवन .

    घर द्वार भूल कर
    पीने में रम गया है मन .

    lajawab ....bahut sundar abhivyakti ...

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  9. आज की ब्लॉग बुलेटिन दुर्घटनाएं जिंदगियां बर्बाद करती हैं और आपदाएं नस्ल .......... मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...
    सादर आभार !

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  10. बहुत ही सार्थक रचना...
    बेहतरीन...

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  11. सीख देती सुंदर रचना , आभार,यहाँ भी पधारे
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/06/blog-post_1787.html

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  12. घुल गयी सुरा साँसों में
    अब खो रहा है जीवन .

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  13. बहुत ही सार्थक रचना

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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