सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Sunday, June 30, 2013

ठूंठ सा वन



ठूंठ ---

१ 


ठूंठ सा तन

पपड़ाया यौवन


पंछी भी उड़े .

२ 


सिसकती सी

ठहरी है जिंदगी

राहों में आज



शुलो सी चुभन 


दर्द भरा जीवन   
मौन रुदन .

सिमटी जड़ें
हरा भरा था कभी
वो बचपन

को से मै कहूं
पीर पर्वत हुई
ठूंठ सी खड़ी

झरते पत्ते
बेजान होता तन
ठूंठ सा वन

राहो में खड़े
देख रहे बसंत
बीता यौवन

जीने की आस
महकने की प्यास
जिंदगी खास .

हिम पिघले
पहाड़ ठूंठ बन
राहो में खड़े.
१०
ठूंठ बन के
सन्नाटे भी कहते
पास न आओ .
११
चीखें बेजान
तड़पती है साँसे
ठूंठ सी लाशें .
1२
मृत विचार
लोलुपता की प्यास
ठूंठ सा मन .


----शशि पुरवार

 

21 comments:

  1. मर्म स्पर्शी ....बहुत भावपूर्ण हाइकु ....!!

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  2. बहुत सुन्दर हाइकु...!
    कल मयंक का कोना में चर्चा मंच पर इस पोस्ट का लिंक लगा दूँगा...!

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  3. त्रासदी को सजा कर रख दिया है मानव ने, सशक्त अभिव्यक्ति।

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  4. आहा ! ठूँठ सा ये एहसास :-)

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  5. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 01/07/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  6. बहुत संवेदनशील हाइकु ...

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  7. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती आभार ।

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  8. मर्मस्पर्शी,तीर से हाइकू ....शशी जी सार्थक प्रस्तुति.....

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  9. राहो में खड़े
    देख रहे बसंत
    बीता यौवन----सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति.
    latest post झुमझुम कर तू बरस जा बादल।।(बाल कविता )

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  10. वाह , बहुत खूब, यहाँ भी पधारे

    http://shoryamalik.blogspot.in/

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  11. शुभप्रभात

    बना(ठूंठ)आधार
    जीना सीखा दिया है
    बेजोड़ रची

    हार्दिक शुभकामनायें

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  12. बहुत सार्थक अभिव्यक्ति .......!!

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  13. ठूंठ बन के
    सन्नाटे भी कहते
    पास न आओ ...

    दिल को छूते हैं सभी हाइकू ...
    बहुत ही लाजवाब ...

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  14. अंतस को छूते बहुत सुन्दर और सार्थक हाइकु...

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  15. जी पहले पढ़ चुका हूं
    बढिया



    जल समाधि दे दो ऐसे मुख्यमंत्री को
    http://tvstationlive.blogspot.in/2013/07/blog-post_1.html?showComment=1372774138029#c7426725659784374865

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  16. मृत विचार
    लोलुपता की प्यास
    ठूंठ सा मन .
    बहुत सुंदर.सटीक.बधाई!

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  17. झरते पत्ते
    बेजान होता तन
    ठूंठ सा वन

    राहो में खड़े
    देख रहे बसंत
    बीता यौवन
    adbhud .........marmik ...vakt ki tashvir ko rekhankit karti rachana bahut achchhi lagi .

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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