सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Sunday, July 14, 2013

दर्द कहाँ अल्फाजों में है




अश्क आँखों में औ
तबस्सुम होठो पे है

सूखे गुल  की दास्ताँ
अब बंद किताबो में है

बीते वक़्त का वो लम्हा
कैद मन की यादों में है

दिल  में दबी है चिंगारी
जलती शमा रातो में है

चुभन है यह विरह की
दर्द कहाँ अल्फाजों में है

नश्वर होती  है  रूह
प्रेम समर्पण भाव में है

अविरल चलती ये साँसे
रहती जिन्दा तन में है

खेल है यह तकदीर का
डोर खुदा के हाथो में है 


शशि  पुरवार

20 comments:

  1. बहुत सही कहा, सुंदर रचना.

    रामराम.

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  2. छोटी बहर की बहुत सुन्दर ग़ज़ल!

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  3. बहुत सुन्दर....
    नश्वर होती है रूह
    प्रेम समर्पण भाव में है
    वाह...

    सस्नेह
    अनु

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  4. खेल है यह तकदीर का
    डोर खुदा के हाथो में है
    Aah! Behad sundar rachana...

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  5. खेल है यह तकदीर का
    डोर खुदा के हाथो में है
    बहुत ही सुन्दर भावों को पिरोया है।

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  6. बीते वक़्त का वो लम्हा
    कैद मन की यादों में है
    bahut sundar abhivyakti .....shubhkamnayen ...!!

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज सोमवार (15-07-2013) को आपकी गुज़ारिश : चर्चा मंच 1307 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. सुंदर प्रस्तुति...
    मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 19-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है...
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी...
    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।



    जय हिंद जय भारत...


    मन का मंथन... मेरे विचारों कादर्पण...


    यही तोसंसार है...

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  9. सूखे गुल की दास्ताँ
    अब बंद किताबो में है

    बीते वक़्त का वो लम्हा
    कैद मन की यादों में है

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  10. खेल है यह तकदीर का
    डोर खुदा के हाथो में है

    बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

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  11. वाह, क्या ही उत्तम और सुन्दर भाव हैँ! सच मेँ डोर तो खुदा के ही हाथोँ मेँ है । बधाई । सस्नेह

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  12. sach kaha.....chalti ka nam zindagi.....bahut sudar


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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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