सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Thursday, October 3, 2013

कण कण में बसी है माँ


कण कण में बसी है माँ।

उडती खुशबु रसोई की
नासिका में समाये
भोजन बना स्नेह भाव से
क्षुधा शांत कर जाय

प्रातः हो या साँझ की बेला
तुमसे ही सजी है माँ
कण कण में बसी है माँ।

संतान के ,सुख की खातिर
अपने स्वप्न मिटाये
अपने मन की पीर ,कभी 
ना घाव कभी दिखलाये 

खुशियाँ ,घर के सभी कोने में
तुमने ही भरी है माँ
कण कण में बसी है माँ .

माँ ने , दुर्गम राहो पर भी
हमें चलना सिखाया
जीवन के हर मोड़ पर भी
ज्ञान  दीप जलाया

संबल बन कर ,हर मुश्किल में
संग  खडी है माँ
कण कण में बसी है माँ।

शांत निश्छल उच्च विचार
मन को खूब भाते
माँ से मिले संस्कार , हम
जीवन में अपनाते

जीवन की हर अनुभूति में
कस्तूरी सी घुली  माँ
कण कण में बसी है माँ।

-- शशि पुरवार
१८ / ९ /१३

माँ से बढ़कर और क्या हो सकता है , इसीलिए यह गीत मेरी माँ को समर्पित करती हूँ ,नमन करती हूँ

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