सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Wednesday, February 12, 2014

गजल -- फूल बागो में खिले। ....




फूल बागों में खिले ये सबके मन भाते भी हैं।
मंदिरों के नाम तोड़े रोज ये जाते भी हैं।

चाहे  माला में गुंथे या केश की शोभा बने
टूट कर फिर डाल से ये फूल मुरझाते भी हैं।

इन का हर रूप-रंग  और  सुरभि भी पहचान है
डालियों पर खिल के ये भौरों को ललचाते भी हैं।

फूल चंपा के खिलें या फिर चमेली के खिले 
गुल ये सारे बाग़ के मधुबन को महकाते भी हैं।

भोर उपवन की सदा तितली से ही गुलजार है
फूलों का मकरंद पीने भौरे  मँडराते भी हैं।

पेड़ पौधों से सदा हरियाली जीवन में रहे 
फूल पत्ते पेड़ का सौन्दर्य दरसाते भी  हैं।
---- शशि पुरवार

17 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (13-02-2014) को दीवाने तो दीवाने होते हैं ( चर्चा - 1522 ) में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. फूलों का अलग अलग आयाम से देखने का सफल प्रयोग है ये गजाल ... लाजवाब ...

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  3. सुन्दर प्रस्तुति बढ़िया अर्थ और भाव


    फूल बागों में खिले ये सबके मन भाते भी हैं।
    मंदिरों के नाम तोड़े रोज ये जाते भी हैं।

    चाहे माला में गुंथे या केश की शोभा बने
    टूट कर फिर डाल से ये फूल मुरझाते भी हैं।

    इन का हर रूप-रंग और सुरभि भी पहचान है
    डालियों पर खिल के ये भौरों को ललचाते भी हैं।

    फूल चंपा के खिलें या फिर चमेली के खिले
    गुल ये सारे बाग़ के मधुबन को महकाते भी हैं।

    भोर उपवन की सदा तितली से ही गुलजार है
    फूलों का मकरंद पीने भौरे मँडराते भी हैं।

    पेड़ पौधों से सदा हरियाली जीवन में रहे
    फूल पत्ते पेड़ का सौन्दर्य दरसाते भी हैं।
    ---- शशि पुरवार
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  4. हर शेर फूलों की खुशबू लिए
    बहुत सुन्दर गजल !

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  5. पेड़ पौधों से सदा हरियाली जीवन में रहे
    फूल पत्ते पेड़ का सौन्दर्य दरसाते भी हैं।
    bahut khoob
    badhai
    rachana

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  6. उम्दा लिखा है..

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  7. भोर उपवन की सदा तितली से ही गुलजार है
    फूलों का मकरंद पीने भौरे मँडराते भी हैं।
    behad sundar rachana prkrtik saundary ki sundar vyakhya ki hai apne ....badhai Shashi ji

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  8. वाह ! बहुत सुंदर रचना !

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  10. शशि जी आशीर्वाद

    चाहे माला में गुंथे या केश की शोभा बने
    टूट कर फिर डाल से ये फूल मुरझाते भी हैं।
    (अतिसुंदर )आपकी लेखनी के गजल गीत के फूल खिलते रहे शुभ कामनाएं

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  11. rang-l birange phul aur unaki upyogita va nashwar prakriti ka abhas karati gagal bahut sunder likhi hai. sach men kali to khilegi roop- ras barsegi aur dhoom bhi macheigi, piyenge parag ali , titliyan bhi dolengi madhu ras chakhengi upavan ki shobha bhi badhaigi,kal ke karon se phir bhi na achuti shesh geern vadana ho dhool men milegi panch tatva men ramegi.sashi ji apaki gagal padh ke kuch bhav jaga so likh diya
    pushpa mehra.

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  12. बहुत ही खूबसूरत

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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