सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Wednesday, February 12, 2014

गजल -- फूल बागो में खिले। ....




फूल बागों में खिले ये सबके मन भाते भी हैं।
मंदिरों के नाम तोड़े रोज ये जाते भी हैं।

चाहे  माला में गुंथे या केश की शोभा बने
टूट कर फिर डाल से ये फूल मुरझाते भी हैं।

इन का हर रूप-रंग  और  सुरभि भी पहचान है
डालियों पर खिल के ये भौरों को ललचाते भी हैं।

फूल चंपा के खिलें या फिर चमेली के खिले 
गुल ये सारे बाग़ के मधुबन को महकाते भी हैं।

भोर उपवन की सदा तितली से ही गुलजार है
फूलों का मकरंद पीने भौरे  मँडराते भी हैं।

पेड़ पौधों से सदा हरियाली जीवन में रहे 
फूल पत्ते पेड़ का सौन्दर्य दरसाते भी  हैं।
---- शशि पुरवार

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