Monday, August 25, 2014

आदमी की आज है दरकार क्या



जंग दौलत की छिड़ी है रार क्या
आदमी की आज है दरकार क्या १

जालसाजी के घनेरे मेघ है
हो गया जीवन सभी बेकार क्या२

लुट रही है राह में हर नार क्यों
झुक रहा है शर्म से संसार क्या ३

छल रहे है दोस्ती की आड़ में
अब भरोसे का नहीं किरदार क्या ४

गुम हुआ साया भी अपना छोड़कर
हो रहा जीना भी अब दुश्वार क्या ५

धुंध आँखों से छटी जब प्रेम की
घात अपनों का दिखा गद्दार क्या६

इन निगाहों में खलिस थी पल रही
आइना भी खोलता है सार क्या  ७

खिड़कियाँ तो बंद हिय की खोलिए
माफ़ अपनों को करो ,तकरार क्या८

धड़कने क्यों हो रही है अजनबी 
रंग जीवन के सभी उपहार  क्या ९

बाँट लो खुशियाँ  सभी जीवन है कम
ख्वाब अँखियों के करे साकार क्या १०

"शशि " कहे तुम रंज अपने भूलकर
बढ़ चलो राहों में अपनी ,वार क्या ११
----------- शशि पुरवार

18 comments:

  1. सुन्दर रचना


    बाँट लो खुशियाँ सभी जीवन है कम
    ख्वाब अँखियों के करे साकार क्या १०
    "शशि " कहे तुम रंज अपने भूलकर
    बढ़ चलो राहों में अपनी ,वार क्या ११

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन ग़ज़ल ....

    अनु

    ReplyDelete
  3. खिड़कियाँ तो बंद हिय की खोलिए
    माफ़ अपनों को करो ,तकरार क्या८ --vaah bahut sundar gazal

    ReplyDelete
  4. uttam rachna. ek sujhav 'rahon men' ke sthan par 'rahon pe' hona chaiye. rah men gitee-mitee / rah par kadam ya raah par yatree... men = ke andar, par/pe = ke oopar. kripaya anyatha n lengee.

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर गजल ..

    ReplyDelete
  6. और क्या ,बेकार की बातें छोड़ कर ऐसा कुछ करें जिससे जीवन सँवरे -अच्छा संदेश पिरोया है शशि !

    ReplyDelete
  7. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज मंगलवार को चुरा ली गई है- चर्चा मंच पर ।। आइये हमें खरी खोटी सुनाइए --

    ReplyDelete
  8. संग्रह योग्य ....

    ReplyDelete
  9. इन निगाहों में खलिस थी पल रही
    आइना भी खोलता है सार क्या ७
    ...वाह...लाज़वाब ग़ज़ल..सभी अशआर बहुत उम्दा...

    ReplyDelete
  10. बहुत ही खूब निर्बहन किया है गज़ल का आपने
    बधाई आपको।

    ReplyDelete
  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट खामोश भावनाओं की ऊपज पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है। शुभ रात्रि।

    ReplyDelete

आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए अनमोल है। हमें अपने विचारों से अवगत कराएं। सविनय निवेदन है --शशि पुरवार

आपके ब्लॉग तक आने के लिए कृपया अपने ब्लॉग का लिंक भी साथ में पोस्ट करें
.



समीक्षा -- है न -

  शशि पुरवार  Shashipurwar@gmail.com समीक्षा है न - मुकेश कुमार सिन्हा  है ना “ मुकेश कुमार सिन्हा का काव्य संग्रह  जिसमें प्रेम के विविध रं...

https://sapne-shashi.blogspot.com/

linkwith

http://sapne-shashi.blogspot.com