सपने

सपने मेरे नहीं आपके व हमारे सपने हे , समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से मेरी जन्मी रचनाएँ आपकी ही आवाज हैं.
इन आँखों में एक ख्वाब पलता
है,
सुकून हो हर दिल में,
इक दिया आश का जलता है.
बदल दो जहाँ को हौसलों के संग
इसी मर्ज से जीवन खुशहाल चलता है - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी . समाज में सकारात्मकता फैलाने का नाम है जिंदगी , बेटियों से भी रौशन होता है यह जहाँ , सिर्फ बेटे ही नही बेटियों को भी आगे बढ़ाने का नाम है जिंदगी।
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, September 8, 2014

जाम छलकाने के बाद






धूप सी मन में खिली है ,मंजिले पाने के बाद
इन हवाओं में नमी है फूल खिल जाने के बाद १

जिंदगी लेती रही हर रोज हमसे इम्तिहान
प्रीति ही ताकत बनी है गम के मयखाने के बाद २

छोड़िये अब दास्ताँ , ये प्यार की ताकीद है  
नज्म हमने भी कही फिर प्रेम गहराने के बाद ३

तुम वहीं थे ,मै वहीं थी और शिकवा क्या करें
मौन बातों की झड़ी थी , दिल को बहलाने के बाद ४  

प्यार का आलम यही था ,रश्क लोगों ने किया
मोम सी जलती रही मै इश्क  फरमाने के बाद ५

खुशनुमा  अहसास है यह बंद पृष्ठों में मिला
गंध सी उड़ती रही है फूल मुरझाने के बाद ६

वक़्त बदला ,लोग बदले ,अक्स बदला  प्रेम का
मीत बनकर लूटता है , जाम छलकाने के बाद ७

प्रेम अब जेहाद बनकर, आ गया है सामने
वो मसलता है कली को ,हर सितम ढाने के बाद ८

-- शशि पुरवार

8 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  2. लाजवाब कहन |बहुत सुन्दर ग़ज़ल |

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  3. तुम वहीं थे ,मै वहीं थी और शिकवा क्या करें
    मौन बातों की झड़ी थी , दिल को बहलाने के बाद ४
    ...वाह...बहुत उम्दा...लाज़वाब ग़ज़ल...

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मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है . अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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