सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, January 23, 2017

उमंगो की डोर



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पर्व खुशियों के मनाने का बहाना है 
डोर उमंगो की बढाओ गीत गाना है १ 

घुल रही है फिर हवा में गंध सौंधी सी 
मौज मस्ती स्वाद का उत्सव मनाना है २

तिल के लाडू, गजक- चिक्की,बाजरा, खिचड़ी 
माँ के हाथों की रची खुशबु  खजाना है ३

संग बच्चों के सभी बूढ़े मिले छत पर 
उम्र पीछे छोड़कर बचपन बुलाना है। ४ 

देखना हैं जोर कितना आज बाजू में 
लहकती नभ में पतंगे  काट लाना है ५ 

संग चाचा के खड़ी चाची कहे हँसकर
पेंच हमसे भी लड़ाओ आजमाना है। ६ 

गॉँव में सजने लगें संक्रांत के मेले 
संस्कृति का हाट से रिशता पुराना है ७ 

उड़ रही नभ में पतंगे, धर्म ना देखें  
फिर कहे शशि प्रेम का बंधन निभाना है ८ 
              -- शशि पुरवार 

5 comments:

  1. Nice feeling thats brings some memories which we have loss in busy life .

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  2. वाह ... मा के हाथों वाला शेर तो बहुत ही ख़ूबसूरत बैन पड़ा है ... लाजवाब ग़ज़ल

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  3. आपकी इस प्रस्तुति की लिंक 26-01-2017को चर्चा मंच पर चर्चा - 2585 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 27 जनवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. संक्रांति पर्व का पूरा समां बाँध दिया आपने शशि जी ! बहुत सुन्दर रचना है ! बधाई आपको !

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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sapne-shashi.blogspot.com