सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Thursday, February 16, 2017

बेनकाब हो जाये

शहर में इंकलाब हो जाए 
गॉँव भी आबताब हो जाए  १ 

लोग जब बंदगी करे दिल  से 
हर नियत मेहराब हो जाए  २ 

हौसले गर बुलंद हो दिल में 
रास्ते कामयाब हो जाए ३  

ज्ञान का दीप भी धरूँ मन में 
जिंदगी फिर गुलाब हो  जाए ४ 

दो कदम साथ तुम चलो मेरे 
हर ख़ुशी बेनकाब हो जाए५ 

कौन रक्षा करे असूलों की 
बद नियत जब जनाब हो जाए ६ 

जुस्तजू है, सृजन करूँ  कैसे
हाल ए दिल शराब हो  जाए ७ 

इक तड़पती गजल लिखूं कोई 
हर पहेली जबाब हो जाए.८ 

पास आये कभी चिलक दिल में 
फिर कहे शशि किताब हो जाए ९ 
शशि पुरवार 
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Friday, February 10, 2017

समर्पण भाव







अनवरत चलते रहें हम 
भूल बैठे मुस्कुराना 
है यही अनुरोध तुमसे  
बस ख़ुशी के गीत गाना।

फर्ज की चादर तले, कुछ 
मर गए अहसास कोमल 
पवन के ही संग झरते 
शाख के सूखे हुए दल 

रच गया बरबस दिलों में 
औपचारिकता निभाना 
है यही अनुरोध तुमसे  
बस ख़ुशी के गीत गाना
  
नित सुबह से शाम ढलती 
दंभ,दरवाजे खड़ा है  
रस  विहिन इस जिंदगी में 
शून्य सा बिखरा पड़ा है। 

क्षुब्ध मन की पीर हरता 
प्रीति का कोमल खजाना 
है यही अनुरोध तुमसे  
बस ख़ुशी के गीत गाना।

साँस का यह सिलसिला ही 
वक़्त पीछे छोड़ता है 
हर समर्पण भाव लेकिन 
तार मन के जोड़ता है.
मैं कभी रूठूँ जरा सा, 
तुम तनिक मुझको मनाना। 
है यही अनुरोध तुमसे 
बस ख़ुशी के गीत गाना। 
     ---- शशि पुरवार 
  

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