Thursday, June 10, 2021

गंधों भरा चिराग

कुछ दोहे
सरसों फूली खेत में, हल्दी भरा प्रसंग
सखी सहेली कर रहीं, कनबतियाँ रस-रंग 1

हल्दी के थापे लगे, मन की उडी पतंग।
सखी सहेली कर रहीं, कनबतियाँ रस-रंग 2

सड़कों के दोनों तरफ, गंधों भरा चिराग
गुलमोहर की छाँव में, फूल रहा अनुराग 3

माता के आँगन खिला, महका हरसिंगार
विगत क्षणों की याद में, मन काँचा कचनार। 4
सरसों फूली खेत में, हल्दी भरा प्रसंग
पुरवाई से संग उडी, दिल की प्रीत पतंग 5

प्रेम राग घुलने लगा,छाया पीत बसंत
पुरवा पंख पसारती, फागुन प्रियवर कंत 6

फागुन आयो री सखी, जैसे बरसी आग
आँखों को शीतल लगे, फूलों वाला बाग़ 7

धरती भी तपने लगी, अम्बर बरसी आग
आँखों को शीतल लगे, फूलों वाला बाग़ 8

मन भी गुलमोहर हुआ, प्रेम रंग गुलजार
ह्रदय वसंती मद भरा ,गीत झरे कचनार 9

अधरों ताले मौन के, पर नैना वाचाल
रंग बसंती प्रीत का , मन फागुन की डाल10
शशि पुरवार





12 comments:

  1. आपकी लिखी रचना आज ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बृहस्पतवार 24 जून 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बेहद खूबसूरत दोहे।
    मनमोहक सृजन।
    सादर।

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  3. बहुत मनभावन दोहे शशि पुरवार जी

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  4. बहुत सुंदर दोहे।

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  5. बेहतरीन सृजन

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  6. बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय

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  7. बेहतरीन दोहे।

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  8. शशि जी , बहुत समय बाद आपके ब्लॉग पर आना हुआ ।
    बेहतरीन दोहे पढ़ने को मिले ।
    सड़कों के दोनों तरफ, गंधों भरा चिराग
    गुलमोहर की छाँव में, फूल रहा अनुराग ।
    बहुत सुंदर ।

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  9. बहुत गहरी रचना...। गहन भाव और गहन शब्दावली।

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  10. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर दोहे।

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  11. बहुत खूबसूरत रचना

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