चापलूसों का सदन में बोल बाला है आदमी ने आदमी को चीर डाला है आँख से अँधे यहाँ पर कान के कच्चे चीख कर यूँ बोलतें, ज्यों हों वही सच्चे. राजगद्दी प्रेम का चसका निराला है रोज पकती है यहाँ षड़यंत्र की खिचड़ी गेंद पाले में गिरी या दॉंव से पिछड़ी वाद का परोसा गया खट्टा रसाला है आस खूटें बांधती है देश की जनता सत्य की आवाज को कोई नहीं सुनता देख अपना स्वार्थ पगड़ी को उछाला है आदमी ने आदमी को चीर डाला है -- शशि पुरवार
होरी आई री सखी ,दिनभर करे धमाल हरा गुलाबी पीत रंग , बरसे नेह गुलाल .1 द्वारे पे गोरी खड़ी , पिया गए परदेश नेह सिक्त पाती लिखी ,आओ पिया स्वदेश2 भेद भाव से दूर ये ,होरी का त्यौहार डूबा जोशो जश्न में , यह सारा संसार 3 होरी के हुडदंग में , हुरियारों की जंग मिल जाए जो सामने ,फेको उस पर रंग .4 अम्मा से बाबू कहे , खेलें होरी आज कहा तुनक कर उम्र का , कुछ तो करो लिहाज .5 होरी की अठखेलियाँ , पकवानों में भंग बिना बात किलकारियाँ , भंग दिखाए रंग 6 ----------------------------------------------------- कुण्डलियाँ होली के हुडदंग में , हुरियारों की जंग मिल जाए जो सामने, उस पर फेको रंग फेको उस पर रंग , नीले पीले गुलाबी घेरो सब चहुँ ओर, यह टोली है नबाबी मस्ती का उन्माद , संग मित्रों के ठिठोली जोश जश्न उल्लास , खेलो प्रेम की होली . हाइकु - १ होली है प्यारी रंग भरी पिचकारी सखियाँ न्यारी २ मारे गुब्बारे लाल पीले गुलाबी रंग लगा रे ३ प्रेम की होली दूर बैठी सखियाँ मस्तानी टोली ४ होली की मस्ती प्रेम का है खजाना दिलों की बस्ती ५ चढ़ा के भंग मौजमस्ती संग बजाओ चंग ----- शशि पुरवार आप सभी ब्लॉगर मित्रों को होली की हार्दिक रंग भरी शुभकामनाएँ