ब्लॉग सपने - जीवन के रंग अभिव्यक्ति के साथ, प्रेरक लेख , कहानियाँ , गीत, गजल , दोहे , छंद

Sunday, February 16, 2014

राग रंग का रोला .... !

सपन सलोने,
नैनो में

जिया, भ्रमर सा डोला है
छटा गुलाबी, गालो को
होले -हौले  सहलाये
सुर्ख मेंहदी हाथो की
प्रियतम की याद दिलाये

बिना  कहे,
हाल जिया का
दो अँखियो ने, खोला है

हँसी ठिठोली, मंगल-गीत
गूँज  रहे है घर, अँगना
हल्दी,उबटन,तेल हिना
खनके हांथो का कंगना

खिला शगुन के
चंदन  से
चंचल मुखड़ा भोला है

छेड़े सखियाँ, थिरक रही
फिर, पैरों की पैंजनियां
बालो में गजरा महके
माथे झूमर ओढ़नियाँ

खुसुर फुसुर की
बतियों ने
कानो में रस घोला है

सखी- सहेली छूट  रही
कल पिय के घर है जाना
फिर ,रंग भरे सपनो  को
स्नेह उमंगो से सजाना

मधुर,
तरानो से बिखरा
राग रंग का रोला है।
-- शशि पुरवार
३० /१ / २०१४

चित्र -  गूगल से आभार 

Wednesday, February 5, 2014

बासंती रंग



1
सपने पाखी
इन्द्रधनुषी रंग
होरी के संग
2
रंग अबीर
फिजा में लहराते
प्रेम के रंग
3
सपने हँसे
उड़ चले गगन
बासंती रंग
4
दहके टेसू
बौराई अमराई
फागुन डोले
5
अनुरक्त मन
गीत फागुनी गाये
रंगों की धुन .

23.03.13
शशि पुरवार
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सदोका ----
1हवा  उडाती
अमराई की जुल्फे
टेसू हुए आवारा
हिय का पंछी 
उड़ने को बेताब
रंगों का समां प्यारा .

2
  डोले मनवा
 ये  पागल जियरा
 गीत गाये बसंती
 हर डाली  पे
खिल गए पलाश
भीगी ऋतू सुगंधी .

3
 झूमे बगिया
दहके है  पलाश
भौरों को ललचाये
कोयल कूके
कुंज गलियन में
पाहुन क्यूँ न आये .

4
झूम रहे है
हर गुलशन में
नए नवेले फूल
हँस रही है
डोलती पुरवाई
रंगों की उड़े धूल .

5
 लचकी डाल
यह कैसा  कमाल
मधुऋतू है आई
 सुर्ख पलाश
मदमाए फागुन
कैरी खूब मुस्काई .

6
जोश औ जश्न
मन  में  है उमंग 
गीत होरी  के गाओ
भूलो मलाल
उमंगो का त्यौहार
झूमो जश्न मनाओ .
24.03.13
शशि पुरवार

हिंदी की चिन्दी

हिंदी दिवस की तैयारी पूरे जोश - खरोश के साथ की जा रही थी। आजकल हर वस्तु  छोटी होती जा रही है।  मिनी कपडे।  मिनी वस्तुएँ।  हर  वस्तु छोटी ...

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