Saturday, September 15, 2012

मेहंदी लगे हाथ......!



मेहंदी लगे हाथ कर रहें हैं 
पिया का इंतजार
सात फेरो संग माँगा है 
उम्र भर का साथ. 


यूँ  मिलें फिर दो अजनबी
जैसे नदी के दो किनारो
का हुआ है संगम, फिर
बदल गयी हैं  दिशाए
जीवन की मधुरम हवाए 

और 
बहने लगी एक जलधारा .

नाजुक होते हैं यह रिश्ते
कांच से कच्चे धागों से बंधी हुई
विश्वास की डोर, दिलो की प्रीत 

,पर
कठिन  हैं जीवन की
पथरीली राहों का सफर.  
मजबूती के साथ चल रहे हैं हम
एक गाड़ी के दो पहिये; जिसे
तोड़ न सके कोई कंकर

प्रेम की इन गलियों में
उलफत कभी न होगी कम
बस इक खलिस है
ह्रदय में; 

 सनम
अंतिम ख्वाहिश मानकर
जिगर में मत रखना कोई रंज
पहले इस जहान  से रुकसत होंगे
 हम , 
इक सुहागन बन कर ही
निकले मेरा दम  

खाली रह जाएँ ना हाथ
करतल पे लगा देना मेहंदी

चढ़ जाये पुनः प्रेम का रंग ; फिर
यह जन्म न मिलेगा बार बार .
----------- शशि पुरवार

23 comments:

  1. बड़ी ही कोमल और मधुर अभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  2. मेहंदी लगे हाथ भी
    उनके हाथों की खुशबू को
    कम नहीं करते
    उसमें मेहंदी का
    सुर्ख रंग और महक
    मिला कर
    मुझे मदहोश करते

    ReplyDelete
  3. बहुत खूबसूरत रचना !
    ये प्यार व क़रार यूँ ही सलामत रहे !:-)
    ~आमीन !

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर भाव से सजी सुंदर रचना

    ReplyDelete
  5. भाव भरे हृदय की भावमयी कविता।

    ReplyDelete
  6. मेहँदी से शुरू हुए ये रिश्तों सात जन्मों के बंधन बन जाते हैं ..
    भाव मय प्रस्तुति है ...

    ReplyDelete
  7. नाज़ुक सी रचना ...बहुत खूब

    ReplyDelete
  8. प्रेम,समर्पण अटूट बंधन.... दिल को छूती हुई बेहद सुन्दर रचना ...
    साझा करने के लिए आभार शशि जी...

    ReplyDelete
  9. Sundar. Coming after so many days and it was a really refreshing to read this beautiful poem.

    ReplyDelete
  10. शशि जी बहुत सुंदर लिखा है ।

    ReplyDelete
  11. bahut sundar bhaav ...
    komal abhivyakti ...
    shubhkamnayen Shashi ji ...!!

    ReplyDelete
  12. मेहँदी की खुशबू सी रचना |

    ReplyDelete
  13. यहाँ भी पढ़कर उतना ही मजा आया डियर बहुत सुन्दर प्यारी प्रस्तुति बहुत बधाई

    ReplyDelete
  14. mehadi ke sath antrng bhavo bhi sapasht ho gye ......wah bahut hi sundar kavita rashmi ji ....sadar abhar.

    ReplyDelete

  15. सुन्दर रचना, सार्थक भाव, बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" की नवीनतम पोस्ट पर भी पधारें , आभारी होऊंगा.

    ReplyDelete
  16. बहुत सुन्दर प्रस्तुति , बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग "प्रेम सरोवर" पर पधारकर मुझे प्रोत्साहित करें। धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  17. सुन्दर प्रस्तुति.

    ReplyDelete

यहाँ तक आएं है तो दो शब्द जरूर लिखें, आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए अनमोल है। स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार

आपके ब्लॉग तक आने के लिए कृपया अपने ब्लॉग का लिंक भी साथ में पोस्ट करें
सविनय निवेदन



साल नूतन

  नव उमंगों को सजाने  आस के उम्मीद के फिर  बन रहें हैं नव ठिकाने भोर की पहली किरण भी  आस मन में है जगाती एक कतरा धूप भी, लिखने  लगी नित एक प...

linkwith

http://sapne-shashi.blogspot.com