Tuesday, August 24, 2021

झील में चंदा

  1

नदियातीरे

झील में उतरता

हौले से चंदा

2

बहती नदी

आँचल में समेटे

जीवन सदी

2

सुख और दुख

नदी के दो किनारे

खुली किताब

3

सुख की धारा

रीते पन्नों पर  भी

पवन लिखे

4

दुख की धारा

अंकित पन्नों पर

जल  में डूबी

5

बहती नदी

पथरीली हैं राहें

तोड़े पत्थर

6

वो पनघट

पनिहारिन बैठी

यमुना तट

7

नदी -तरंगे

डुबकियाँ लगाती 

काग़ज़ी नाव

8

लिखें तूफ़ान

तक़दीरों की बस्ती

नदिया धाम

9

बहता पानी

विचारों की रवानी

नदिया रानी

-0-

 शशि पुरवार 




Saturday, January 2, 2021

उम्मीद के ठिकाने

 

साल नूतन आ गया है 
नव उमंगों को सजाने 
आस के उम्मीद के फिर 
बन रहें हैं नव ठिकाने

भोर की पहली किरण भी 
आस मन में है जगाती
एक कतरा धूप भी, लिखने 
लगी नित एक पाती

पोछ कर मन का अँधेरा 
ढूँढ खुशियों के खजाने
साल नूतन आ गया है
नव उमंगों को सजाने

रात बीती, बात बीती 
फिर कदम आगे बढ़ाना 
छोड़कर बातें विगत की 
लक्ष्य को तुम साध लाना

राह पथरीली भले ही 
मंजिलों को फिर जगाने 
साल नूतन आ गया है
नव उमंगों को सजाने

हर पनीली आँख के सब 
स्वप्न पूरे हों हमेशा 
काल किसको मात देगा 
जिंदगी का ठेठ पेशा

वक़्त को ऐसे जगाना 
गीत बन जाये ज़माने ​​
साल नूतन आ गया है
नव उमंगों को सजाने

- शशि पुरवार   


तोड़ती पत्थर

  तोड़ती पत्थर  वह तोड़ती पत्थर; देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्थर। कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार; श्याम त...

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