सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

follow on facebook

https://www.facebook.com/shashi.purwar

FOLLOWERS

Thursday, November 29, 2012

अब कर दो विदा




अब कर दो विदा

जकड़ी मान्यताएं

थोथले है विचार
परंपरा के नाम पे
आदमी लाचार
बेगारी का फंदा ,
बना जी का जंजाल,
ऐसे फरमानों को
अब कर दो विदा .

इर्ष्या के कीड़े से
कलुषित हुआ मन
बदले की आग में
सुलगता है तन
साखर में पगा है
धूर्त का संसार
ऐसे मेहमानों को
अब कर दो विदा

सोया हो जमीर ,तो
कैसे उच्च विचार
चील,कौए सा युद्ध
छिछोरा आचार
शैवाल सा बढ़ता
काला व्यापार
ऐसे धनवानों को
अब कर दो विदा

---------शशि पुरवार

linkwith

sapne-shashi.blogspot.com