सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Wednesday, December 5, 2012

एक भूल और .............................!



1 लघुकथा ----

अनिरुद्ध अपनी पत्नी और दो बच्चो के साथ  हंसी ख़ुशी जीवन  कर रहा था , वह सॉफ्टवेर   मेनेजर था , और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर जाता था . इस बार जब वह वापिस आया तो पत्नी नेहा  की तबियत ठीक नहीं दिखी रही थी ,बुखार था व  थोड़ी कमजोरी  दिख रही थी . अनिरुद्ध चिंतित हो गया और उसने  नेहा से पूछा --

"नेहा क्या हुआ , डाक्टर को दिखाया ...?"
" कुछ नहीं , ठीक हूँ , बुखार के कारण  कमजोरी आ गयी है , आजकल वायरल भी तो फैला है "
" हाँ यह तो है  , परन्तु अपना ध्यान रखो ....... "
परन्तु बुखार कभी कम होता तो कभी बढ़ जाता . इधर  आजकल कुछ दिनों से बेटे की तबियत भी बिगड़ने लगी थी , चेहरे और शरीर पर दाने निकलने लगे और बुखार भी बार बार आ रहा था , उधर  निशा का स्वास्थ धीरे -धीरे बिगड़ता जा रहा था , और वह दिन पर दिन कमजोर होती जा रही थी , एक दिन तो वह काम करते करते  गिर गयी ,अनिरुद्ध दोनों को  अस्पताल   लेकर गया तो वहां नेहा एवं बेटे  को एडमिट कर लिया गया ,  सभी प्रकार की जांच शुरू हो गयी .  शाम को डाक्टर ने अनिरुद्ध से कहा कि --

" आप धीरज रखें , और अपनी पत्नी को भी हिम्मत दें , और एक बार आप अपनी और बेटी  के  भी खून की भी जाँच करा लें "
" क्यूँ डाक्टर  ......... क्या हुआ है मेरी नेहा को , और हम सभी भी .........?"
" मै एतिहात के तौर पर सभी की एच . आई , वी टेस्ट करवा रहा हूँ , आपकी पत्नी और बेटे की रिपोर्ट  पॉजिटिव रिपोर्ट आई है और आखिरी स्टेज पर पहुच चुकी है "
" यह सुनते ही अनिरुद्ध जड़  हो गया , उसके मन मस्तिष्क ने जैसे काम करना ही बंद कर दिया हो ..."

        परिवार के सभी सदस्य की जांच हुई तो पता चला कि सभी इस बीमारी से ग्रसित  है , वह ग्लानी से भर गया , उसके रंगीन मिजाज स्वाभाव और असंयम के कारण  आज पूरा परिवार काल के द्वार पर खड़ा था और सभी की निगाहे उससे खामोश  सवाल कर रही थी ...जिससे वह नजर भी नहीं उठा पा रहा था .
-----शशि पुरवार .

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2 लघुकथा ---

सुलोचना स्वयं को बुद्धिमान समझती थी और हमेशा पैसे बचाने  के चक्कर में रहती थी , एक बार उसकी तबीयत  जरा नासाज थी , तो पास में ही डाक्टर को दिखाने  चली गयी .वहां डाक्टर ने उसे दवा  और इंजेक्शन  लेने के लिख कर दिया  , वह कम्पाउंडर  के पास गयी तो देखा वहां बहुत से लोग लाइन में बैठे है और वह सभी को एक एक करके  सुई लगा रहा था , हर सुई को वह वहां के रखें बर्तन में जिसमे गर्म पानी था उसमे  डाल देता और दूसरी को निकालकर उससे इंजेक्शन लगाता .सुलोचना ने सोचा गर्म पानी में तो सभी कीटाणु  मर जाते है तो नयी डिस्पोजेबल सुई में क्यूँ फालतू में पैसे खर्च करना ,
जब  सुलोचना की बारी आई तो कम्पाउंडर ने कहा --
" आपका परचा .........?"
" हाँ यह लीजिये .....आप लगा दीजिये , यह इंजेक्शन है "
" ठीक है ......"
फिर  वह  गर्वित भाव से घर आ गयी ....
".कुछ नहीं होता है , आजकल मेडिकल वालों ने भी सामान बेचने के लिए धंधा बना लिया है ......क्या पहले नहीं लगती थी सभी यह सुई ....... सोचते सोचते घर आ गया "

बिमारी तो ठीक हो गयी , परन्तु जो हुआ उसकी कल्पना किसी को नहीं थी . 2-3 महीने बाद जब सुलोचना थकी थकी सी रहने लगी तो घर वालो को चिंता हुई , उसे डाक्टर के पास ले गए , सारी  जांच हुई तो पता चला की एच . आई .वी . के कीटाणु खून में पाए गए , यह जानकर सभी सदमे में आ गए की यह कैसे हो गया . सुलोचना विचलित हो गयी . डाक्टर ने कहा --
" आप चिंता मत करो शुरुआत है , आपका इलाज हो सकता है "
" पर डाक्टर यह कैसे हो गया ....हम कितनी सावधानी बरतते है , ....."
" यह संक्रमण का रोग है ,  यह किसी से भी हो सकती है ,  इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति  के संपर्क में आने पर , या संक्रमित व्यक्ति का खून यदि दिये जाने पर या संक्रमित व्यक्ति को लगाईं  हुई सुई का उपयोग करने पर भी यह बीमारी  हो जाती है ....अनेक ऐसी सावधानियां हमें बरतनी चाहिए ...    आप ध्यान कीजिये ऐसा कुछ आपके साथ घटित हुआ है क्या ........? "

डाक्टर की बातें सुनकर सुलोचना शांत हो गयी और स्वयं की गलती का अहसास उसे हो गया , थोड़ी सी बचत करने के चक्कर में उसने अपनी ही जान का खतरा मोल ले लिए , शर्म आ गयी स्वयं के शिक्षित होने पर ...........  बुरा वक़्त कभी भी  कह कर नहीं आता , स्वयं सावधानी लेना आवश्यक है .

-----शशि पुरवार 

29 comments:

  1. आँखें खोलती हुई कहानी है शशि....
    जागरूकता बहुत ज़रूरी हैं....
    आभार इस लेखन के लिए..
    सस्नेह
    अनु

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  2. BAHUT ACCHI KAHANIYAAN HAIN. MAIN BHI LAGHU KATHAYEN LIKHATA HOON. KRIPAYA PADH KAR RAI DEIN.

    http://www.blogger.com/blogger.g?blogID=6802523079696122177#allposts

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  3. uff.!! marmik..Word Aids Day pe saarthak pahal..
    behtareen!!
    God Bless Shashi!!

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  4. behatreen kahaniyaan...

    www.pranshuprashu.blogspot.com

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  5. http://www.blogger.com/blogger.g?blogID=6802523079696122177#overview/src=dashboard

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  6. सार्थक लघु कथाएँ ....जागरूकता बहुत आवश्यक है ...!!

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  7. जागरूक करती हुई दोनों लघुकथाएं ...

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  8. बहुत ही मार्मिक और संदेशपरक लघुकथाएँ हैं
    शशि जी बधाई

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  9. ज्ञानवर्धक ...सादर

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  10. दोनों ही कहानियाँ, सीख देती हुयी।

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  11. जागरूक करती लघुकथा
    अरुन शर्मा
    www.arunsblog.in

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  12. मर्म स्पर्शी लघु कथा।


    सादर

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  13. Bahut sunder "Laghukatha" BADHAI...

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  14. बहुत अच्छी लघुकथाएँ हैं शशि, शिक्षाप्रद और भाव पूर्ण। बधाई आपको।

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  15. गंभीर मुद्दे की तरफ खींचती सार्थक कहानी !!!

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  16. दोनों कहानियाँ बेहद भावपूर्ण और शिक्षाप्रद हैं.

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  17. प्रेरक कथाएं..

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  18. वाह जी दोनों बढ़ि‍या हैं

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  19. सोचने को विवश करती कथाएं।

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  20. शशि जी
    दोनों लघुकथाओं में आपने बहुत कुछ कहने का प्रयास किया है
    सावधान करती लघुकथाओं के लिए बधाई !


    शुभकामनाओं सहित…

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  21. कहानिउओं के माध्यम से गहरी बात समझा दी आपने ...
    सावधानी की जरूरत है ...

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  22. dono laghu kahaniya gambhir artho me lipti huyee ek hakiki dastavej hai aur aaj ke paridrishy ki bolti juban,bahut hi sundar prastuti

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  23. शशि जी, लघुकथाएँ अच्छी लगीं. सर्थक, सोद्देश्य. बधाई.

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  24. आप ने न०१,न०२ दोनों में उपयोगी सन्देश दिया है। यदि पाठक समझ जायें तो निश्चित उन के लाभकारी होगा।
    आभार इस लेखन का,

    विन्नी

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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