सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

follow on facebook

FOLLOWERS

Tuesday, January 13, 2015

नदिया तीरे


१ 
नया विहान
शब्दों का संसार
रचें महान

झुकता नहीं
आएं लाख तूफ़ान
डिगता नहीं

मन चंचल
मचलता मौसम
सर्द है रात

नदिया तीरे
झील में उतरता
हौले से चंदा

बिखरे मोती
धरती के अंक में
फूलों की गंध

एक शाम
अटूट है बंधन
दोस्ती के नाम

साथ तुम्हारा
महका तन मन
प्यार सहारा
 शशि पुरवार

12 comments:

  1. नदिया तीरे
    झील में उतरता
    हौले से चंदा ..
    बहुत ही लजवाब ... नाजुक हाइकू ...
    कुछ शब्दों में लम्बी कहानी लिखी हो जैसे ...

    ReplyDelete
  2. सुन्दर हाइकु

    ReplyDelete
  3. आपकी लिखी रचना बुधवार 14 जनवरी 2015 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  4. देखन में छोटे लगे पर घाव करें गंभीर..सुंदर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  5. आपकी हर रचना बहुत गहरी और मारक होती है .... बहुत सुन्दर ..

    ReplyDelete
  6. ​बहुत ही बढ़िया ​!

    ReplyDelete
  7. सभी बहुत सुन्दर हाइकू है ....

    ReplyDelete
  8. बूँद में सागर सामान उत्कृष्ट हाइकू ! बहुत सुन्दर !

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर और प्रभावी हाइकु...

    ReplyDelete
  10. सरस-सार्थक हाइकु.

    ReplyDelete

नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



linkwith

sapne-shashi.blogspot.com