सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Saturday, July 7, 2012

माँ उदास ....!



माँ उदास
मारती रही औलाद 
तीखे संवाद ,
भयी कोख उजाड़ .

बरसा सावन तो
पी  गए नयन
दबी सिसकियां
शिथिल तन
उजड़ गयी कोख
तार तार दामन .

खून से सने हाथ 
भ्रूण न ले सके सांस 
चित्कारी आह 
हो रहा गुनाह
माँ की रूह को 
छलनी कर 
सिर्फ पुत्र चाह .

जिस कोख से जन्मे देव 
उसी कोख के
अस्तित्व का सवाल
सृष्टि की सृजक नारी 
आत्मा जार जार 
हो रहा कत्लोआम 
परिवर्तन की पुकार .
                   माँ उदास ......भयी  कोख उजाड़ ....! 
-------    शशि पुरवार





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