सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Friday, February 10, 2017

समर्पण भाव







अनवरत चलते रहें हम 
भूल बैठे मुस्कुराना 
है यही अनुरोध तुमसे  
बस ख़ुशी के गीत गाना।

फर्ज की चादर तले, कुछ 
मर गए अहसास कोमल 
पवन के ही संग झरते 
शाख के सूखे हुए दल 

रच गया बरबस दिलों में 
औपचारिकता निभाना 
है यही अनुरोध तुमसे  
बस ख़ुशी के गीत गाना
  
नित सुबह से शाम ढलती 
दंभ,दरवाजे खड़ा है  
रस  विहिन इस जिंदगी में 
शून्य सा बिखरा पड़ा है। 

क्षुब्ध मन की पीर हरता 
प्रीति का कोमल खजाना 
है यही अनुरोध तुमसे  
बस ख़ुशी के गीत गाना।

साँस का यह सिलसिला ही 
वक़्त पीछे छोड़ता है 
हर समर्पण भाव लेकिन 
तार मन के जोड़ता है.
मैं कभी रूठूँ जरा सा, 
तुम तनिक मुझको मनाना। 
है यही अनुरोध तुमसे 
बस ख़ुशी के गीत गाना। 
     ---- शशि पुरवार 
  

5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (12-02-2017) को
    "हँसते हुए पलों को रक्खो सँभाल कर" (चर्चा अंक-2592)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. सुन्दर रचना

    ReplyDelete

नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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sapne-shashi.blogspot.com