सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Tuesday, July 8, 2014

पीपल वाली छाँव जहाँ ...

 ,

बिछड़ गये है सारे अपने
संग-साथ है नहीं यहाँ,
ढूँढ रहा मन पीपल छैंयाँ
ठंडी होती छाँव जहाँ.

छोड़ गाँव को, शहर आ गया
अपनी ही मनमानी से,
चकाचौंध में डूब गया था
छला गया, नादानी से
मृगतृष्णा की अंधी गलियाँ
कपट द्वेष का भाव यहाँ
दर्प दिखाती, तेज धूप में
झुलस गये है पाँव यहाँ,

सुबह-साँझ, एकाकी जीवन
पास नहीं है, हमजोली
छूट गए चौपालों के दिन
अपनों की मीठी बोली
भीड़ भरे, इस कठिन शहर में
खुली हवा की बाँह कहाँ

ढूंढ़ रहा मन फिर भी शीतल
पीपल वाली छाँव यहाँ।
--- २  जून - २०१४ 

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