सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, January 11, 2016

दफ्तरों से पल




दफ्तरों से बन गए है,
जिंदगी के पल
शाम से मिलते, थके दिन
रात का आँचल।

अब समय के साथ चलते,
दौड़ते साये
चाँद - तारों सी तमन्ना
हाथ में लाये
नींद आँखों में नहीं है
प्रश्न का जंगल।

अक्स अपना देखते, जब 
रोज दरपन में
भार से काँधे झुके है
रोष है मन में
बस नजर आती नहीं है
इक हँसी निश्छल।

धूप बैठी हाशिये पर
ढल गया यौवन
भीड़ में कुछ ढूँढता है
यह प्रवासी मन
रात गहराने लगा है
आँख का काजल।
      ---- शशि पुरवार

5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 12 जनवरी 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी को दर्शाती बहुत सुंदर रचना

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  3. आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी को दर्शाती बहुत सुंदर रचना

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  4. आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की १२०० वीं पोस्ट ... तो पढ़ना न भूलें ...
    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "तुम्हारे हवाले वतन - हज़ार दो सौवीं ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. utaar-chadhaw ka warnan karti ek saarthk kavitaa.

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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sapne-shashi.blogspot.com