Monday, November 17, 2014

नन्ही परी

मेरे मायके में नन्ही परी भतीजी बनकर आई है। स्नेह आशीष के साथ नामकरण करना था, तो नामकरण कविता के रूप में किया। बुआ की तरफ से नन्ही निर्वी  के लिए स्नेहाशीष -
`


बदल गया हैं घर का मौसम , ऋतु खुशियों की है आई
नन्ही नन्ही ,प्यारी निर्वी , घर - अँगना  रौनक लाई
दादा - दादी ,नाना -नानी , भूले दुख के सब अंधियारे
बचपन के संग  डूब  गए , फैले  हैं  सुख के उजियारे
ताऊ- ताई, मौसा - मौसी ,सब दूर देश के वासी
बुआ -फूफा, सौम्या -अवनि ,बोलें हम भी है अभिलाषी
नटखट गुड़ियाँ ने छेड़ी  हैं , बजी सबके मन झंकार
वाट्स आप बाबा के जरिये , सभी  मिलकर बाँटें प्यार
दादी पम्मो , घर के सारे, नाते - रिश्ते, जीता है  बचपन 
किलकारी से गूँज रहा है देखो, अब अपना  घर - आँगन
-- शशि पुरवार

5 comments:

  1. नन्ही नन्ही ,प्यारी निर्वी को शुभाशीष व प्यार ...
    सुन्दर आशीर्वचन

    ReplyDelete
  2. निर्वी को बहुत बहुत प्यार ...
    और आपको बधाई ...

    ReplyDelete
  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के - चर्चा मंच पर ।।

    ReplyDelete
  4. कोमल भावनाओं की सुन्दर रचना। महालक्ष्मी को प्रणाम। इसी तरह स्वागत हो हर घर में महालक्ष्मियों का तब बनेगा मेरा भारत महान अभी तो अाधी दुनिया हाशिये पर है।

    ReplyDelete
  5. कोमल भावनाओ का अतिसुन्दर चित्रण

    ReplyDelete

यहाँ तक आएं है तो दो शब्द जरूर लिखें, आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए अनमोल है। स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार

आपके ब्लॉग तक आने के लिए कृपया अपने ब्लॉग का लिंक भी साथ में पोस्ट करें
सविनय निवेदन



तोड़ती पत्थर

  तोड़ती पत्थर  वह तोड़ती पत्थर; देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्थर। कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार; श्याम त...

https://sapne-shashi.blogspot.com/

linkwith

http://sapne-shashi.blogspot.com