Monday, August 22, 2016

सुख की मंगल कामना








बाबुल के अँगना खिला, भ्रात बहन का प्यार 
भैया तुमसे भी जुड़ा, है मेरा संसार। 

माँ आँगन की धूप है, पिता नेह की छाँव 
भैया बरगद से बने , यही प्रेम का गॉँव 

सुख की मंगलकामना, बहन करें हर बार 
पाक दिलों को जोड़ता, इक रेशम का तार 

चाहे कितने दूर हो, फिर भी दिल से पास 
राखी पर रहती सदा, भ्रात मिलन की आस 

प्रेम डोर अनमोल ये, जलें ख़ुशी के दीप 
माता के आँचल पली, बेटी बनकर सीप 
-- शशि पुरवार 


5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 25 अगस्त 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  2. कच्चे धागों में भाई-बहिन का अटूट प्यार छुपा रहता है
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  4. अद्भुत । अप्रतिम । बेमिसाल । वाह वाह रचना ।

    ReplyDelete

यहाँ तक आएं है तो दो शब्द जरूर लिखें, आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए अनमोल है। स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार

आपके ब्लॉग तक आने के लिए कृपया अपने ब्लॉग का लिंक भी साथ में पोस्ट करें
सविनय निवेदन



साल नूतन

  नव उमंगों को सजाने  आस के उम्मीद के फिर  बन रहें हैं नव ठिकाने भोर की पहली किरण भी  आस मन में है जगाती एक कतरा धूप भी, लिखने  लगी नित एक प...

linkwith

http://sapne-shashi.blogspot.com