सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, August 8, 2011

फिर मानवता बिलख उठी ...!


कितना   बे-गैरत   है   जमाना  
   चाहते  है   एक   आशियाँ   बनाना  . 
 
  मिटटी - गारा   तो  लाये                   
        और  फिर  सामान  फैला  कर  
  इक   टूटा  आशिया  बना  दिया  .


 मानव   मुल्यो   की   क्या   जगह    है   यहाँ  ,
   पर  कीमत  तो   आको 
   मानव  खुद  ही  बिक  जायेगा   यहाँ  !


    प्रेम  क्या  है  ?
     पूछो   इन   माटी  के   पुतलो  से  -

     " पैसा   ही  तो   प्रेम   है  ".

   सुन्दरता  क्या  है   ? 
              पूछो  इन    हस्तियों  से  ,

         "  पैसा  ही  सबसे   सुन्दर  है  " .

  इंसानियत  को   न  जानने   वाले    ये   मानव 
   इंसानियत  का   ही   ढोल  पीटते  है  !

  जिंदगी  से   खिलवाड़   करने   वाले  ये   मानव ,
      सभ्यता  को   कौन   सा   रूप  प्रदान   करते   है  ?

                                    

                                       :  - शशि   पुरवार






यह   कविता   पत्रिकाओ   में    प्रकाशित    हो    चुकी   है

14 comments:

  1. अच्‍छा लगा आपके ब्‍लॉग पर आकर....आपकी रचनाएं पढकर और आपकी भवनाओं से जुडकर....
    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. Beautiful Shashi...Words have so much depth...

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  3. संजय जी

    आपका बहुत- बहुत धन्यवाद . आपको कविताये पसंद आई .

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  4. bahut shukriya aapke bahumoolya tippani ka jiske madhyam se aapke blog se jud rahi hoon.bahut achche bhaav ukeren hain kavita me likhte rahiye.

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  5. pls word veryfication hata den to tippani karne me aasani hogi.

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  6. जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले ये मानव ,
    सभ्यता को कौन सा रूप प्रदान करते है ?

    जो हमें पसंद नहीं हो और जो इनको पसंद है वही करते हैं यह ...और आज मानवता को इन्होने किस गर्त में धकेल दिया है यह सबके सामने है .....आपका आभार

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  7. आपका लेखन यूँ ही अनवरत रूप से जारी रहे इसके लिए आपको हार्दिक शुभकामनायें

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  8. शशी जी आपकी रचनायें दिल से लिखी व भावों से भरी हैं...
    अद्भुत लेखन है आपका,मन मोह लिया आपने...

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  9. धन्यवाद , केवल राम जी

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  10. धन्यवाद , इंदु जी

    आप आये और रचनाये पसंद की ...... आपका धन्यवाद

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  11. Manavta ko gaharaye tak sanrakshit karney ki disha mai ek manviye paryas ko NAMAN .....Tathastu

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  12. omparkash ji
    dhanyavad . apko yaha dekhkar khushi hui.

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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