सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Tuesday, September 18, 2012

जाने कहाँ आ गए हम



जाने कहाँ आ गए हम
छोड़ी धरती
चूमा गगन .

आकांशाओ  के  वृक्ष  पर  
बारूदो का  ढेर बनाया
तोड़े पहाड़ , कटाये   वन 
दूषित कर पवन ,रोग लगाया
सूखी हरीतिमा की  छाँव
सिमटे  खेत , गाँव
बना  मशीनी इंसान
पत्थर की मूरत भगवान .

जग का बदला स्वरुप
नए उपकरण ,
मशीनी इंसान ,
रोबोट सीखे काम ,
नए नए  आविष्कार
खूब फला कृत्रिम व्यापार 
मशीनी  होते काम
मानव  चाहे पूर्ण  आराम
माथे की मिट जाये  शिकन .

भर बारूद , रोकेट
संग, उड़  चला अंतरिक
विधु  पे पड़े कदम 
मिला नया मुकाम ,
पर धुएं में मिले जहर से 
कम होती ओजोन की  छाँव
सौर मंडल पर भी
प्रदुषण के बढ़ते कदम
यह हार है या जीत
जब खतरा बन रही
जीवन पर , अविष्कारों 
की बढती भीड़
न बच सकी धरणी 
न छूटा  गगन .
-------------शशि पुरवार

19 comments:

  1. हमें इतनी सुन्दर धरोहर मिली थी, हम नष्ट करने पर तुले हैं।

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  2. sachhi...jeevandayani maa ko noch rahen hain...nasht karne par tule hain...

    nice poem shashi
    bless u
    anu

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  3. आपकी कविता में भावों की गहनता व प्रवाह के साथ भाषा का सौन्दर्य भी है .उम्दा पंक्तियाँ .

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  4. बिल्कुल सही कहा आपने...! आगे बढ़ते बढ़ते हम क्या कुछ खोते जा रहे हैं.... इसके बारे में सोचने की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है..! बहुत बढ़िया रचना !
    ~सादर !

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  5. कलयुग की इस रेश में,मशीन बना इंसान
    अविष्कार करते रहे ,भूल गये भगवान,,,,,,,,

    RECENT P0ST फिर मिलने का

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  6. सार्थक रचना..
    हम आगे तो बढ़ रहे है.पर प्रकृति के मोल को
    नष्ट करके..जो भविष्य के लिए उचित नहीं...

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  7. आपकी रचनायें दिल को छू जाती हैं, गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

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  8. वाह ... बेहतरीन

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  9. ये हार है या जीत ... बस कभी कभी ये नहीं समझ आता ..
    पर फिर भी निर्माण, सृजन तो होता रहेगा ...
    लाजवाब रचना है ...

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  10. कल 21/09/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  11. पूर्ण अर्थ लिए हुए खूबसूरत रचना

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  12. sach hai ki ham paryawaran par bahut atyachar kar rahe hain

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  13. दुःख तो इस बात का है ..की सब कुछ जानने पर भी ...हम कुछ नहीं कर रहे ......something substantial!!!

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  14. बहुत सुन्दर भाव पूर्ण.... अपनी पृथ्वी के पर्यावरण से छेड़छाड़ के बाद अन्य ग्रहों की ओर ..बढ़ चले हम....बेहद मार्मिक प्रस्तुति....

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  15. यह विकास कहीं हमारे विनाश का कारण न बने...बहुत सार्थक प्रस्तुति..

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  16. We have done so much wrong in the name of development. Wish we can maintain a balance. Thought provoking poem.

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  17. यह तथाकथित दिशाहीन विकास ही सर्वनाश का कारण बनता जा रहा है ।
    सुन्दर रचना के लिए बधाई ।

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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