सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Saturday, April 25, 2015

जब मुकद्दर आजमाना आ गया




जब  मुकद्दर आजमाना आ गया
वक़्त भी अपना सुहाना आ गया

झूमती हैं डालियाँ गुलशन सजे
ये समां भी कातिलाना आ गया

ठूंठ की इन बस्तियों को देखिये
शामे गम महफ़िल सजाना आ गया

आदमी  जब  राम से रावण बने
आग में खुद को जलाना आ गया

दर्द जब मन की  हवेली के मरे
रफ्ता रफ्ता मुस्कुराना आ गया

भागते हैं लोग अंधी दौड़ में
मार औरों को गिराना आ गया

जालिमों के हाथ में हथियार हैं
खौफ़ो वहशत का ज़माना आ गया

मौत से अब डर नहीं लगता मुझे
जिंदगी को गुनगुनाना आ गया

-- शशि पुरवार

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. Nice Article sir, Keep Going on... I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us.. Happy Independence Day 2015, Latest Government Jobs. Top 10 Website

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    1. thank you so much vadhiya ji .... but i am not sir ... :)

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  3. मौत से अब डर नहीं लगता मुझे
    जिंदगी को गुनगुनाना आ गया ,
    यही फलसफा है जो हमे जीना सीखा सकता है ! शशि जी , अति सुंदर

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  4. मौत से अब डर नहीं लगता मुझे
    जिंदगी को गुनगुनाना आ गया
    ...वाह..उम्दा...बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल..

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (26-04-2015) को "नासमझी के कारण ही किस्मत जाती फूट" (चर्चा अंक-1957) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    Replies
    1. आप सभी माननीय मित्रों का तहे दिल से आभार

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  6. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार...

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  7. मौत से अब डर नहीं लगता मुझे
    जिंदगी को गुनगुनाना आ गया ..
    बहुत खूब .. जब जिंदगी को गुनगुनाना आ जाता है पब सारे डर हवा हो जाते हैं ... बहुत ही लाजवाब शेर इस सुन्दर ग़ज़ल का ...

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  8. बहुत खूब
    मंगलकामनाएं आपको !

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  9. इस सुन्दर गजल के लिए दिल से आभार।

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  10. बस जिंदगी को गुनगुनाना आ जाये तो सब कुछ अपने आप ही आ जाता है
    अच्छी गज़ल

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  11. मैं आशा करूंगा कि मुझे समय मिलेऔर मैं आपकेब्लाग को पूरा पढ लूं... मेरे ब्लाग पर भी आपको आने का न्योता भेज रहा हूं...
    चौखट पर आइये...

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नमस्कार मित्रों, आपके शब्द हमारे लिए अनमोल है यहाँ तक आ ही गएँ हैं तो अपनी अनमोल प्रतिक्रिया व्यक्त करके हमें अनुग्रहित करें. स्नेहिल धन्यवाद ---शशि पुरवार



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