सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Saturday, June 16, 2018

बच्चों वाले खेल

उत्सव की वह सौंधी खुशबू 
ना अंगूरी बेल 
गली मुहल्ले भूल गए हैं 
बच्चों वाले खेल 

लट्टू, कंचे, चंग, लगौरी 
बीते कल के रंग 
बचपन कैद हुआ कमरों में 
मोबाइल के संग 

बंद पड़ी है अब बगिया में 
छुक छुक वाली रेल 
गली मुहल्ले भूल गए हैं 
बच्चों वाले खेल. 

बारिश का मौसम है, दिल में 
आता बहुत उछाव 
लेकिन बच्चे नहीं चलाते 
अब कागज की नाव 

अंबिया लटक रही पेड़ों पर 
चलती नहीं गुलेल 
गली मुहल्ले भूल गए हैं 
बच्चों वाले खेल. 

दादा - दादी, नाना - नानी
बदल गए हालात 
राजा - रानी, परी कहानी 
नहीं सुनाती रात 

छत पर तारों की गिनती 
सपनों ने कसी नकेल 
गली मुहल्ले भूल गए हैं 
बच्चों वाले खेल.
शशि पुरवार 
चित्र गूगल से साभार 

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