सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Friday, July 12, 2013

अभी कुछ और करिश्मे गजल के देखते है






चलो नज़ारे यहाँ आजकल के देखते है
अजीब लोग है कितने ये चल के देखते है

गली गली में यहाँ पाप कितना है फैला
खुदा के नाम से ईमान छल के देखते है

ये लोग कितने  गिरे आबरू से जो खेले
झुकी हुई ये निगाहों को मल के देखते है

ये जात पात के मंजर तो कब जहाँ से मिटे  
बनावटी ये जहाँ से निकल के देखते है

कलम कहे कि जिधर प्यार का जहाँ हो ,चलो

अभी कुछ और करिश्मे गजल के देखते है .
---- शशि पुरवार

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