सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, April 15, 2013

राहे चलती

शशि  पुरवार .
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1
शीत काल में
केसर औ  चन्दन
काया दमके  .
2
अलसाये से
तृण औ लतिकाए
चाँदी चमकी  .
3
सर्दी  है आई
गुड की चिक्की भाई
अलाव जले  .
4
हिम से जमे
ह्रदय के जज्बात
मै को से कहूं .
5
श्वेत  रजाई
धरा को खूब भाई
कण दमके .
6
सर्द मौसम
सुलगती है पीर
नीर न बहे .
7
तन्हा सड़क 
कंपकपाती राते
चाँदनी हँसे .
8
खोल खिड़की
आई शीत लहर
भानु भी डरा .

9
 थकित मन
दूर बैठी मंजिल
राहे चलती . 
  ----शशि पुरवार

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तांका --

1 .
झरते कण
अब ढँक रहे थे
वृक्ष औ रास्ते
हम तुम भी  साथ
जम गए जज्बात .
2
सर्द मौसम
सुनसान थे रास्ते
और  किनारे
कोई सिमट रहा
था, फटी कामरी में .
3
भाजी बहार
टमाटर लाल औ
गाजर संग
सूप की भरमार
लाल हुए है गाल .
4
मटर कहे
मेरी है बादशाही
गाजर बोली
सूप हलुआ लायी
सब्जियों की लड़ाई .
5
जमती साँसे
चुभती है पवन
फर्ज प्रथम     
जवानों की गश्त के
बर्फीले है कदम .

शशि पुरवार

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