Saturday, October 6, 2012

मेरे सपनो का ताजमहल


मेरे ख्वाबों  का
सुन्दर आशियाना
प्यार की रेशमी डोर
विश्वास का खजाना
सतरंगी सपनो से
आने वाले कल की
झालर बनाना
बचपन के पलों को
सहेज पिटारे में रख
पंछी बन उड़ जाना ,
आकांशाओ के वृक्ष पे
आशा का दीपक रखना
पूर्ण ,अपूर्ण अनुभूतियों की
एक ख्वाबगाह बनाना
दीवारों पे अपने नाम का
दुधियाँ रंग सार्थक कर
शशि की शीतलता
को जग में फैलाना। 
अमावस की काली रात में
कलम से उकेरे शब्दों की
शीतल किरणों सा प्रकाश
दीप प्रज्वलित करना
जीवन की राहो में
पी का साथ निभाना। 


कांटो को चुन ,उसकी
राहो में फूल बिछाना ,
नहीं कोई चाहत दिल में
बस मेरे जाने के बाद तुम
मेरे सपनो का ताजमहल
मत बनाना , खुश रहना
मुझे मेरी कलम में ही ढूंढ लेना
मै अविरल सी बहती हूँ मेरे
ख्वाबो के ताजमहल में
जब जी चाहे मेरे
सपनो की घाटियों में
एक फूल ले चले आना
सदा अमर रहूंगी
शब्दों के माध्यम से
जब जी चाहे चाहे
आकर मिल जाना .
--शशि पुरवार

20 comments:

  1. बहुत सुंदर ...मर्मस्पर्शी.....

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  2. बहुत सुन्दर...
    भावुक कर दिया शशि....

    सस्नेह
    अनु

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  3. दिल छूने वाले भावों को मेरा सलाम शशि जी | इस सुन्दर रचना के लिए सादर आभार |

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  4. बेहद सुन्दर भावुक करती है रचना उम्दा

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  5. बहुत सुन्दर , आभार

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  6. कितना प्यार क्षलकता है इस कविता में. हृदयस्पर्शी भावपूर्ण प्रस्तुति.

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  7. mere sabhi mitro ka abhar jinhone apne sneh se yah aangal sajaya hai aur sadaiv protsaahit kiya hai . anmol hai aap sabhi ki samiksha mitro ,apna sneh banaye rakhen ,-----shashi

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  8. बिल्कुल सही..... सार्थक रचना

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  9. बहुत ही सुन्दर कविता |वाकई प्रेम की डोर रेशमी होती है |

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  10. भई वाह ...
    आभार आपका खूबसूरत अभिव्यक्ति के लिए !

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  11. सुन्दर चित्रांकन खुबसूरत जज्बात

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  12. बहुत सुंदर...भावपूर्ण रचना ! मन को महकाती हुई सी निकल गयी..
    ~सादर !!!

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  13. बहुत ही बेहतरीन भावपूर्ण रचना..

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