सपने

सपने मेरे नहीं आपके सपने, हमारे सपने, समाज में व्याप्त विसंगतियां मन को व्यथित करती हैं. संवेदनाओं की पृष्ठभूमि से जन्मी रचनाएँ मेरीनहीं आपकी आवाज हैं. इन आँखों में एक ख्वाब पलता है, सुकून हो हर दिल में इक दिया आश का जलता है. - शशि.
शशि का अर्थ है -- चन्द्रमा, तो चाँद सी शीतलता प्रदान करने का नाम है जिंदगी .
शब्दों की मिठास व रचना की सुवास ताउम्र अंतर्मन महकातें हैं. मेरे साथ सपनों की हसीन वादियों में आपका स्वागत है.

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Monday, April 22, 2013

हर मछली को लील रहा



शांत जल में आया है   
कैसा यह भूचाल
हर मछली को लील रहा 
जल का नाग आज.

विषधारी हो गये है
मगरमच्छ सारे
शैवालो पर बैठकर  
शिकारी डेरा डारे
फँस गयी यहाँ जलपरी
धँस गई आवाज

शांत जल में आया ...!

फूल गया है सेमर
हुआ लाल पानी
दैत्यों की कहानी तो
कहती थी नानी
बढ़ गयी है पशुता
मेंढक धरे ताज
शांत जल में आया ...!

उथला हो गया है
तंत्र का आँगन
अब फना हो रहा है
कँवल का जीवन
तड़प रहे है जलचर 
न्याय मांगे आज 
शांत जल में आया ...

21-04-13
  ------शशि पुरवार 

 सेमर -- दलदल ,
 तंत्र -- प्रणाली , स्वत्रन्त्र तत्वों का समूह ,
 पशुता -- हैवानियत ,दरिंदगी ,
  कँवल -कमल
 
 

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